कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते घोरावल ब्लॉक के अरौली ग्राम पंचायत के ग्रामीण।
सदर ब्लॉक की मारकुंडी ग्राम पंचायत में फर्जी राशन कार्ड बनने का खुलासा हुआ है। डीएम ने गुप्त जांच कराई तो फर्जी कार्डों के साथ ही फर्जी यूनिट का भी मामला सामने आया है। जांच में जिला पूूर्ति कार्यालय की मिलीभगत की बात सामने आई है। एक लिपिक को उन्होंने कलेक्ट्रेट से संबद्ध कर दिया है। फर्जी राशन कार्ड मामले की जांच शुरू करा दी है। चेताया है कि जो भी जिम्मेदार मिला, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
जिले की सस्ते गल्ले की दूकानों से अनाज आदि के वितरण के लिए पात्रों का राशन कार्ड बन रहा है। इसमें बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा। जिला पूर्ति कार्यालय और कुछ कोटेदार और प्राइवेट लोगों के सिंडिकेट के जरिये जो व्यक्ति गांव में है ही नहीं उसका भी कार्ड बना दिया जा रहा। इतना ही नहीं छोटे परिवार वालों का भी ज्यादा यूनिट का कार्ड बनाया जा रहा। इसमें बड़ा रैकेट कार्य कर रहा है।
डीएम सीबी सिंह ने बताया कि उन्होंने जांच कराई तो पता चला कि मारकुंडी ग्राम पंचायत में करीब एक हजार अपात्रों का राशन कार्ड तो बनाया ही गया है, ऐसे नाम से कार्ड बनाए गए हैं जो गांव में रहते ही नहीं हैं। कार्ड के यूनिट के नाम पर भी बड़ी गड़बड़ी की गई है। फर्जी यूनिट और फर्जी राशन कार्ड के नाम पर बड़ी हेराफेरी की जा रही थी। अब इस मामले में नए सिरे से जांच कराई जा रही है। बताया कि ग्राम पंचायत में फिलहाल फर्जी पाए गए करीब एक हजार राशन कार्ड तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिये गए हैं। इन कार्डों पर अनाज आदि के उठान पर रोक लगा दिया गया है। बताया कि जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में तैनात लिपिक कोटेदारों को फोन कर वसूली के लिए दबाव बनाता है। पूर्व में दुद्धी में रहे एसडीएम विश्राम सिंह ने उसके खिलाफ एफआईआर भी कराई थी। उसे तत्काल प्रभाव से कलेक्ट्रेट से संबद्ध कर दिया गया है और उसकी जांच शुरू कर दी गई है।