सोनभद्र। जिले के सभी निकायों में शुक्रवार तक वार्डो के आरक्षण को लेकर आपत्तियां ली गई। इसमें नगर पंचायत ओबरा के चार वार्डो में 10 आपत्तियां आई है। आपत्ति दर्ज कराने वालों ने नियम के अनुसार आरक्षण में बदलाव की मांग की है। सोनभद्र, डाला और चोपन निकाय में आरक्षण पर एक भी आपत्ति नहीं आई।
शासन की तरफ से वार्डो के आरक्षण की अनंतिम सूची जारी करते हुए इस पर आपत्तियां मांगी गई थी। इस पर शुक्रवार तक आपत्ति लेते हुए शासन में रिपोर्ट भेजना था। 25 वार्डों वाले नगर पालिका परिषद सोनभद्र में वार्डो के आरक्षण पर एक भी आपत्ति नहीं आई। ईओ विजय कुमार यादव ने इसकी पुष्टि की। डाला बाजार नगर पंचायत की ईओ देवहुति पांडेय ने भी एक भी आपत्ति न मिलने की बात कहीं। नगर पंचायत चोपन में भी आरक्षण पर एक भी आपत्ति नहीं पड़ी है। वहीं ओबरा नगर पंचायत के वार्ड नंबर छह, 12, 13 और 15 के आरक्षण पर 10 आपत्तियां आई है। आपत्ति में नियमों के पालन न करने का हवाला दिया गया है। वहीं प्रभारी ईओ महेंद्र सिंह का कहना है कि आपत्तियां ली गई है। रहीं वार्डो के आरक्षण की बात तो वह नियमानुसार हुई है।
निकाय के आरक्षण का मामला पहुंचा कोर्ट
ओबरा। नगर पंचायत अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति श्रेणी में आरक्षित किए जाने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। इस पर शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश प्रितिंकर दिवाकर ने इस पर आपत्ति निस्तारित करते हुए कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। इस बीच अगर चुनाव संपन्न भी होता है तो उसका भविष्य याचिका के फैसले पर निर्भर करेगा। आनंद पटेल दयालु ने अधिवक्ता अभिषेक कुमार चौबे के माध्यम से याचिका दायर करते हुए कहा था कि निकाय का आरक्षण नियमों के विपरीत है। अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया है। सोनभद्र में तीन सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ओबरा की सीट लगातार अनुसूचित श्रेणी में गई है, जबकि रेणुकूट, पिपरी और चोपन की सीटें नहीं बदल रहीं।