विदित हो कि मां धूमावती का मंदिर नैमिषारण्य स्थित काली पीठ में एक मात्र है। प्रत्येक नवरात्र में पड़ने वाले शनिवार को ही माता के दर्शन संभव हो पाते हैं अन्यथा पूरे वर्षपर्यन्त माता के दर्शन सम्भव नहीं होते हैं।
शनिवार को सुबह से मां धूमावती के दर्शन के लिए श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। सुबह से देर शाम तक सुहागिनों ने माता के दूर से ही दर्शन कर अपने पति व पुत्रों की रक्षा एवं दीर्घायु की कामना की। काली पीठाधीश गोपाल शास्त्री ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्र में एक ही शनिवार है, इसलिए भक्तों को मां के दर्शन का सौभाग्य आज ही सम्भव था।
अष्टम बैकुंठ तीर्थ नैमिषारण्य स्थित आदि शक्ति मां ललिता धाम में पुजारी गोपाल शास्त्री ने माता की पूजा-अर्चना कर आरती उतारी और माता का स्तुतिगान किया। शारदीय नवरात्र में जहां एक ओर प्रतिदिन मां के दरबार को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है, वहीं प्रात: व सायंकालीन आरती के समय भक्तों का उत्साह देखने लायक होता है।