गणेश चतुर्थी (सकट) का पर्व बुधवार को परंपरागत ढंग से मनाया गया। अपने पुत्रों के सुख-वैभव तथा दीर्घायु की कामना से माताओं ने निर्जला व्रत रखा। शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया। इसके अलावा मंदिरों व घरों में गणेश जयंती पर विशेष पूजा आयोजित की गई।
शास्त्रों के अनुसार माघ कृष्ण चतुर्थी को गणेश जी अवतरित हुए थे। इस दिन को गणेश जयंती भी कहते हैं। मान्यता है कि इस तिथि को माता द्वारा अपने पुत्रों के सुख-संपन्नता व लंबी उम्र की कामना से निर्जला व्रत रखने पर उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। यह पर्व सकट के नाम से भी जाना जाता है।
बुधवार को परंपरागत तरीके से सकट पूजा का आयोजन घरों में किया गया। माताओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा। शाम को तिल के लड्डू व अन्य सामग्री के साथ व्रती माताओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
जिसके बाद शुभ मुहूर्त 8:40 बजे चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारायण किया। गणेश जयंती के मौके पर मंदिरों में काफी चहल-पहल रही। श्रद्धालुओं ने गणेश जी का वंदन कर परिवार की मंगलकामना का आशीर्वाद मांगा।