नमी का हवाला देकर मंडी के क्रय केंद्रों पर आने वाले किसानों के धान को वापस लौटाया जा रहा है। यह अलग बात है कि अभी तक इन क्रय केंद्रों पर धान की बोहनी तक नहीं की गई है, लेकिन वे धान खरीदने से कतरा रहे हैं।
खास बात तो यह है कि मंडी तक अनाज लाने में लगने वाले भाड़े को निकालने व भाग दौड़ से निजात पाने के लिए किसान औने-पौने दामों पर धान बेचने को मजबूर हैं।
जिले में किसानों से धान खरीदने के लिए प्रशासन ने 54 सरकारी क्रय केंद्र खोले हैं। इन केंद्रों को पहली अक्तूबर से खोल दिया गया है। ताज्जुब की बात तो यह है कि 14 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, बावजूद इसके किसी भी क्रय केंद्र पर अभी तक धान का एक दाना भी नहीं खरीदा गया है।
इस संबंध में जिम्मेदारों का कहना है कि जो धान क्रय केंद्रों पर पहुंच रहा है, वो धान मानक के अनुरूप नही है। बहरहाल सच्चाई कुछ भी हो, लेकिन क्रय केंद्रों पर धान की खरीद न होने से किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पड़ोसी जिला लखीमपुर के मैगलगंज का रहने वाला हूं, कस्बा सीतापुर की सीमा पर पड़ता है। इसलिए धान बेचने के लिए सीतापुर मंडी आया। यहां पर लगे सरकारी क्रय केंद्र पर धान दिखवाया। क्रय केंद्र पर मौजूद जिम्मेदारों ने नमी अधिक होने का हवाला देते हुए, धान को खरीदने से इंकार कर दिया। इस वजह से एक आढ़ती के हाथ 950 रुपये कुंतल के हिसाब से धान को बेचा है।