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11 गांवों में घुसा बाढ़ का पानी 

Tue, 11 Jul 2017 10:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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बाढ़
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घाघरा की बाढ़ ने अब भयावह रूप लेना शुरू कर दिया है। मंगलवार को रेउसा के 11 गांवों में घाघरा का पानी घुस गया। जबकि 22 गांव बुरी तरह से पानी से घिरे हुए हैं। गुरगुचपुर के निकट पुलिया को बाढ़ का पानी बहा ले गया।
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इससे 20 गांवों के लोगों का संपर्क टूट गया है। बाढ़ के साथ कटान भी कर रही है। दस बीघा फसल भी नदी में बह गई है। बाढ़ के विकराल रूप को देखते हुए ग्रामीणों ने पलायन शुरू कर दिया है।

उधर, बैराजों से साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी और छोड़ा गया। इससे बुधवार तक स्थिति और भयावह होने का अंदेशा जताया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों को अलर्ट कर दिया है। घाघरा में सोमवार से बढ़ रहे पानी ने देर रात भयानक रूप लेना शुरू कर दिया।
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घाघरा के उफनाने से तटीय क्षेत्र में बाढ़ आ गई है। तटीय क्षेत्र के कोनी, दुर्गा पुरवा, रामलाल पुरवा, गोड़ियन पुरवा, लोधपुरवा, फौजदार पुरवा, गार्गीपुरवा, गौढ़ी, नगीना पुरवा, सुंदर नगर, बंधापुरवा बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

रास्ते जलमग्न हैं और घरों में पानी घुस गया है। गुरगुचपुर गांव के निकट पुलिया बाढ़ के पानी में बह गई। इससे क्षेत्र के 20 गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क कट गया है। रेउसा क्षेत्र के ही मरेली, जैतहिया, जिन्नापुरवा, ठेकेदार पुरवा, सुकई पुरवा, सोमवारी पुरवा, लालापुरवा, मौजी पुरवा, जंगल टपरी, खुशीराम पुरवा, कटैला पुरवा, दर्जिन रेती, आशाराम पुरवा आदि 22 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।

गांव के करीब के खेत बाढ़ के पानी में जलमग्न हो गए हैं। वहीं गांव के मार्ग भी बाढ़ के पानी में समा गए हैं। गोड़ियनपुरवा गांव के तीरथराम की 5 बीघा मेंथा फसल खेत समेत कटकर घाघरा में बह गई है।

इसी तरह से परमेश्वरपुरवा निवासी मुन्ना की 5 बीघा खेती कटकर बाढ़ में बह गई है। उधर, टापू पर बसे पचीसा गांव में भी बाढ़ ने दस्तक दे दी है। टापू के कई हिस्से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

इससे टापू पर बसे 300 परिवारों में हड़कंप मच गया है। बाढ़ की वजह से टापू से 9 किलोमीटर दूरी तक पानी ही पानी नजर आ रहा है। बाढ़ का भयावह रूप देख तटीय क्षेत्र में अफरातफरी मची है।

गांवों के लोग जरूरी सामान समेटकर परिवार समेत सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर रहे हैं। उधर घाघरा, शारदा व बनबसा बैराज से 3,57,843 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि जिस रफ्तार से बाढ़ का पानी बढ़ रहा है, उससे स्थिति और भी भयावह हो सकती है। 
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