सीतापुर। धीरू भाई रात के 12 बज गए हैं। काफी रात हो गई है। अपना नंबर कब आएगा... भाई अभी एनाउंस हुआ था, एक घंटे बाद अपना बक्सा खुल जाएगा। चलो कुछ देर आराम कर लेते हैं। नहीं भाई जब तक काउंटिंग पूरी नहीं हो जाएगी, सोना मना हैं। नींद नहीं आएगी। अरे श्यामू रात के तीन बज रहे हैं और कितनी देरी और लगेगी।
सुबह से कुछ नहीं खाया है, यहां पर भी कुछ मिल नहीं रहा है। चलो भाई थोड़ा और इंतजार करो बस परिणाम आने वाला है। भाई परेशान मत हो, अगर जीत मिल गई तो इस नींद की भरपाई हो जाएगी। फिर क्या, पांच बरस तक चैन की बंसी बजाएंगे। ठीक कह रहे हो भाई यही करते हैं। कुछ इस तरह की बातें 19 विकासखंडों में चल रही मतगणना के समय रात में सुनाई दी।
कोई अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने को आतुर दिखा तो किसी ने बक्सा खुलने के इंतजार में नींद की एक झपकी तक नहीं ली। पंचायत चुनाव के लिए मतगणना रविवार सुबह आठ बजे से चल रही है। इसके लिए 19 विकासखंडों में मतगणना केंद्र बनाए गए है। इन जगहों पर ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्य की मतगणना चल रही है।
लेकिन मतपत्र गिनाने में काफी अधिक समय लग रहा है। न्याय पंचायतवार मतगणना हो रही है। ऐसे में सीरियल नंबर आने में समय लग रहा है। लेकिन प्रत्याशी अपने एजेंटों के साथ मतगणना केंद्रों के बाहर डटे हुए हैं। रविवार सुबह से लेकर रात तक प्रत्याशी व समर्थक वहीं पर डटे रहे। मतगणना केंद्रों के बाहर कोई सोता हुआ नहीं दिखाई दिया।
अगर किसी का देर से नंबर आया तो वह एक जगह पर बैठकर आपस में बाते करता रहा। बस सब एनाउंस होने का इंतजार ही करते रहे। जैसे ही ग्राम पंचायत की मतगणना शुरू होने की बारी आती तो यह लोग तुरंत वहां पर पहुंच जाते है। पूरी रात बात करते ही काट दी। परिणाम का इतना अधिक जुनून दिखाया कि भूखे प्यासे रहकर भी परिणाम जानने में उल्लास कम नहीं होने दिया।
लॉकडाउन के चलते दुकानें बंद थी। इससे वहां पर कुछ खाने पीने का इंतजाम भी नहीं था। इक्का दुक्का ठेला वाले ही वहां पर लाइया चना बेच रहे थे। महोली के मतगणना केंद्र पर खड़े मयंक ने बताया कि न तो दिन, न ही रात में कुछ खाया है। अब घर जाकर ही खाऊंगा। पिसावां केंद्र पर ओपी तिवारी बोलते है अरे भैया खाना तो रोज खा लेते है, आज नहीं मिला कोई बात नहीं। बस अपना प्रत्याशी जीत जाए। समझो मेरा पेट भर गया।
अपनी बारी का करते रहे इंतजार
रात में तो प्रत्याशी जागते रहे, वहीं दिन में धूप का प्रकोप भी इनके हौसले को डिगा नहीं सका। दिन में 36 डिग्री तापमान में वह खुले आसमान के नीचे खड़े होकर बस बारी का इंतजार करते रहे। इस दौरान प्रत्याशियों के चेहरे पर धूप की कोई सिकन तक नहीं दिखाई दी। बस परिणाम आने का ही इंतजार करते रहे। अगर किसी को पेड़ की छांव मिल गई तो ठीक, नहीं मिली तो भी ठीक है।