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खेतों में समा गया वराह कूप

Wed, 24 Feb 2016 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
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नैमिषारण्य क्षेत्र में ऐतिहासिक 84 कोसी होली परिक्रमा मेले के पड़ाव गुम होने के कगार पर हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही से नामचीन पड़ाव स्थल का वजूद खतरे में हैं। न तो ढंग का रास्ता है और न ही पड़ाव स्थल पर उतनी जमीन बची है। पूज्यनीय मंदिर व स्थल भी लापता हो रहे हैं।
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सरकार इन पड़ाव स्थलों को संवारने के लिए करोड़ों का बजट पास कर चुकी है लेकिन इन पड़ाव स्थलों को तलाशने में ही जिम्मेदारों को पसीने छूट रहे हैं। परिक्रमा से पहले जब इन पड़ाव स्थलों की जमीनी हकीकत देखी गई तो बेहद चौंकाने वाले पहलू सामने आए। पहला पड़ाव कोरौना इस कदर बदहाल है कि यहां का ऐतिहासिक तीर्थ सूखा पड़ा है।

करीब ही वराह कूप हैं, जो खेतों में समा चुके हैं। शास्त्रों में इस कूप को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। जिसके मुताबिक ये कूप बेहद पूज्यनीय हैं। वहीं यह ऐसा पड़ाव है जहां महर्षि दधीचि के अलावा भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण तक आ चुके हैं। एक समय था जब इस पड़ाव पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु डेरा डालते थे।
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आज इस स्थल पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु नहीं ठहर सकते हैं। जबकि इस परिक्रमा में करीब 3 लाख की संख्या में श्रद्धालुओं का रेला चलता है। जो हर पड़ाव स्थलों पर पड़ाव डालता है। जबकि एक लाख की संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है।

जिस तरह से वराह कूप खेतों में समा गया है, ठीक उसी तरह से पड़ाव स्थल की भूमि भी खेतों व अवैैध कब्जों की भेंट चढ़ गई है। पड़ाव स्थल तक मौजूद खेत स्वामी दावा कर रहे हैं कि राजस्व अभिलेखों में यह भूमि उनके नाम हैं। लाजिमी है कि इस स्थल की बर्बादी में जिम्मेदारों का भी हाथ है, जहां पड़ाव स्थल की स्थिति बदहाल है, वहीं परिक्रमा मार्ग भी दुरुस्त नहीं हैं।

सड़क उखड़ चुकी है। पथरीले मार्ग पर श्रद्धालु अगर गुजरेंगे, तो उनके पैर जख्मी हो सकते हैं। सवाल यह उठता है कि पड़ाव स्थल को दुरुस्त करने के लिए जो करोड़ों का बजट आया है, उसे कहां और किस तरह से खर्च किया जाएगा।
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