कैश संकट ने गुरुवार को दो लोगों की जान ले ली। सकरन में जहां एक ग्रामीण की रुपये के अभाव में इलाज न कराने से मौत हो गई। वहीं दूसरी ओर कमलापुर के लछिमनपुर में परिवार को भुखमरी कगार पर देख एक युवक ने सदमे में दम तोड़ दिया। वह पिछले छह दिनों से बैंक के चक्कर काट रहा था लेकिन उसे कैश नहीं मिल रहा था। युवक मजदूरी कर परिवार चलाता था।
सकरन के ऊंचगांव निवासी मुन्नालाल (55) कई दिनों से बीमार चल रहा था। बुधवार को उसकी मौत हो गई। घटना को लेकर मृतक की पत्नी तारावती का कहना है कि उसके पति 20 दिन से बीमार थे। उनका लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में उपचार चल रहा था।
इलाज के लिए वह खानपुर स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक शाखा में जमा 55 हजार में से कुछ रकम निकालने गई थी। जिसके चलते आठ नवंबर को महज दो हजार रुपये बैंक से मिले थे। इसके बाद वह चक्कर काटती रही, लेकिन पैसे नहीं मिले।
उसका आरोप है कि बैंक शाखा प्रबंधक व कर्मचारियों ने रुपये नहीं दिए। जिसके चलते उसके पति की इलाज के अभाव में मौत हो गई। उसने शाखा प्रबंधक को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए डीएम से शिकायत की है।
इस बारे में शाखा प्रबंधक टीपी सिंह का कहना है कि 28 नवंबर से बैंक में कैश नहीं आया। जबकि कैश के लिए प्रतिदिन हेड ऑफिस को डिमांड भेजी जाती है। कैश की उपलब्धता न होने के कारण लोगों को पैसा नहीं मिल पा रहा है।
उधर, कमलापुर के लछिमनपुर मेरा कौमा में रहने वाला अजय सिंह (38) मां और पत्नी सहित तीन बच्चों का परिवार चला रहा था। लखनऊ में मजदूरी के दौरान दो दिसंबर को उसे छह हजार रुपये दिए गए। सारे नोट एक हजार की मिलने पर अजय के सामने खर्च चलाने की मुश्किल खड़ी हो गई।
लिहाजा, वह घर आ गया और सारे रुपये इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की शाखा सीतारसोई के अपने खाते में जमा कर दिए। जिसके बाद रुपये निकालने को वाउचर भरा तो बैंक से कैश न होने का हवाला देकर वापस लौटा दिया गया। अजय हर रोज बैंक जाता और मायूस होकर घर लौट आता।
लगातार छह दिनों तक बैंक के चक्कर काटने पर भी उसे रुपये नहीं मिल सके। गुरुवार को भी वह खाली हाथ लौटा। पत्नी बिंदेश्वरी के मुताबिक शाम 6 बजे मायूसी की हालत में घर पहुंचा अजय ने सिर में तेज दर्द होने की बात कही। जिसके बाद वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा और फिर नहीं उठा।