सीतापुर। धान खरीद घोटाले में मार्केटिंग इंस्पेक्टर समेत दो आरोपियों को रामपुर मथुरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी पकड़ में नहीं आया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। सेवता विधायक ज्ञान तिवारी के प्रयासों से रामपुर मथुरा धान क्रय केंद्र का भ्रष्टाचार उजागर हुआ लेकिन इस मामले ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। धान खरीद में इस भ्रष्टाचार ने जिले भर के क्रय केंद्रों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर दिया है। रामपुर मथुरा के धान क्रय केंद्र पर 24 हजार क्विंटल खरीद दिखाई गई है।
प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया कि इसमें वास्तविक किसानों का मात्र एक हजार क्विंटल ही धान होगा। बाकी धान बिचौलियों के माध्यम से खरीदा गया है। रामपुर मथुरा धान क्रय केंद्र खुलते ही यहां से शिकायतें आनी शुरू हो गई। सेवता विधायक ने महमूदाबाद तहसील प्रशासन को इस संबंध में जानकारी दी। लेकिन एसडीएम ने विधायक की बात को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद जब केंद्र की शिकायतों का अंबार लगा तब सेवता विधायक खुद निरीक्षण करने पहुंच गए। पहले दिन रविवार होने के कारण केंद्र से सभी नदारद मिले। विधायक ने डीएम से शिकायत की तो उन्होंने टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए।
सोमवार को जिला स्तरीय टीम जांच करने पहुंची। विधायक भी पूरा दिन जांच के दौरान केंद्र पर डटे रहे। केंद्र पर प्रारंभिक जांच में भारी गड़बड़ी सामने आई। इस पर मार्केटिंग इंस्पेक्टर प्रवीण सिंह, दलाल, राजू टेलर व पंकज जायसवाल के विरुद्ध जालसाजी समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया गया। पूरे मामले में सेवता विधायक का हस्तक्षेप शुरू से रहा इसलिए अमूमन सुस्त रहने वाली पुलिस ने इस केस में तेजी दिखाते हुए मार्केटिंग इंस्पेक्टर प्रवीण सिंह को मंगलवार देर शाम क्रय केंद्र से व दलाल पंकज जायसवाल को उसके प्रतिष्ठान से गिरफ्तार कर लिया। रामपुर मथुरा थाना प्रभारी सुरेश चंद्र मिश्र ने बताया कि बुधवार उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया है।
जिले की खरीद प्रक्रिया पर सवालिया निशान
धान खरीद घोटाले की शायद यह पूरे प्रदेश की पहली एफआईआर होगी जो मार्केटिंग इंस्पेक्टर के खिलाफ दर्ज की गई। जिले में प्रशासन दावा कर रहा है कि उसने लक्ष्य से डेढ़ गुना धान खरीद लिया है। लेकिन इस धान खरीद में पारदर्शिता कहां है, इस घोटाले के बाद यह एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। रामपुर मथुरा धान क्रय केंद्र पर उजागर हुए भ्रष्टाचार के बाद जिले में प्रशासन की जीरो टॉलरेंस की नीति पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। धान खरीद में पारदर्शिता मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता थी। इसमें भ्रष्टाचार सिस्टम पर बहुत बड़ा प्रश्न चिह्न है। सबसे खास बात यह है कि खाद्य व रसद विभाग मुख्यमंत्री के पास है। इस विभाग को ही धान खरीद की प्रदेश में जिम्मेदारी मिली है।
भुगतान के लिए चक्कर काट रहे किसान
धान खरीद में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश व आरोपियों की गिरफ्तारी से क्षेत्र के सैकड़ों किसान परेशान नजर आए। दरअसल, रामपुर मथुरा क्रय केंद्र प्रभारी द्वारा सैकड़ों किसानों को धान खरीद की पावती रसीद नहीं दी गई है। कुछ किसानों का आधा व कम पेमेंट ही किया गया। ऐसे में वह सभी किसान परेशान हैं, जिनको कम पैसा मिला या रसीद नहीं मिली। वह अब क्रय केंद्र के चक्कर काट रहे हैं। विधायक ज्ञान तिवारी ने मंगलवार व बुधवार को रामपुर मथुरा में मौजूद रहकर अनेकों किसानों को पावती रसीद दिलाने का काम किया है।
सरकार जीरो टालरेंस पर काम कर रही है। लेकिन सरकारी मशीनरी के कुछ अधिकारी विपक्षियों के साथ मिलकर सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह मामला उसी का उदाहरण है। उन्होंने कहा, पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी स्वयं पूरे मामले को देख रहे हैं। अन्य जो भी जिम्मेदार होंगे उनका उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा। वह चाहे किसी भी पद पर बैठे हो, जरूरत पड़ी तो यह पूरा मामला शासन के समक्ष रखा जाएगा।
- ज्ञान तिवारी, विधायक सेवता