मछरेहटा (सीतापुर)। राजकीय नलकूपों से किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। कोई नलकूप आठ तो कोई पांच साल से खराब पड़ा है। कुछ नलकूप तो देखरेख के अभाव में बदहाल हो गए हैं। कई नलकूपों के भवन झाड़ियों से घिर गए हैं। ऐसे में किसान खेत की सिंचाई निजी व किराये के संसाधनों से करने के लिए मजबूर हैं।
महंगी सिंचाई करने से खेती-बाड़ी का खर्च बढ़ जा रहा है। कई बार तो नुकसान तक उठाना पड़ता है। किसानों के मुताबिक शिकायत करने पर भी संबंधित विभाग के अधिकारी सुनते नहीं हैं। नलकूप भवन पर अवर अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता तक के सीयूजी नंबर अंकित हैं लेकिन नंबर मिलाने पर कॉल रिसीव ही नहीं की जाती है।
किसानों का कहना है कि सरकारी नलकूप सही करा दिया जाएं तो कम खर्च में अच्छी पैदावार होने से लाभ बढ़ जाएगा। कई बार अधिकारियों से शिकायत की लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
किसान बोले- खेती के लिए खरीदना पड़ता है पानी
किसान शत्रुघन व देवकी नंदन ने बताया कि राजकीय नलकूप सिर्फ शोपीस बने हुए हैं। ऐसे में खेती करना मुश्किल हो गया है। किसान ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह, श्रावण सिंह व भगौती प्रसाद ने बताया कि नलकूप खराब होने से खेत में पानी काफी दूरी से लाना पड़ता है। इसमें 200 रुपये प्रति बीघा किराया देना पड़ता है। पाइप का किराया अलग से देना पड़ता है। पुत्तू लाल व सरजू ने बताया कि खेती करने के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है। यहां खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
सीयूजी नंबर मिलाते रहो, नहीं उठती कॉल
नलकूप विभाग के अधिकारियों की मनमानी शासन के निर्देशों पर भारी है। राजकीय नलकूपों पर जेई, एई और ईई का सीयूजी नंबर इस उद्देश्य से अंकित कराया जाता है ताकि किसान अपनी समस्या अथवा शिकायत दर्ज करा सकें। मछरेहटा क्षेत्र के नलकूपों पर जेई का 9454414248, एई का 9454415780 और ईई का 9454414250 सीयूजी नंबर अंकित है। अलग-अलग नंबरों से तीनों सीयूजी नंबरों को कई बार मिलाया गया लेकिन न काॅल रिसीव हुई और न बैक कॉल ही आई।लीड
आठ साल से सिंचाई का संकट, बोरिंग के गड़्ढे से हादसे का भी खतरा
कुनेहटा लच्छी रामपुर के मजरा रामुवापुर में नलकूप संख्या-174 लगभग आठ वर्षों से खराब है। यहां ट्रांसफार्मर व बिजली का कोई भी उपकरण मौजूद नहीं है। पाइप निकाले जा चुके हैं। किसान प्रेम कुमार ने बताया कि नलकूप खराब होने से सिंचाई का तो संकट बना ही हुआ है, भवन भी खुला पड़ा है। अंदर बोरिंग का गहरा गड्ढा है, बच्चों के जाने से हादसे का खतरा भी बना हुआ है।
10 साल से खराब, कई बार शिकायत पर भी नहीं बना
बिजुवामऊ का नलकूप सांख्य-312 लगभग 10 वर्षों से खराब पड़ा है। पाइप समेत काफी सामग्री नलकूप विभाग के कर्मचारी निकाल ले गए हैं। किसान भानु प्रताप सिंह के अनुसार 10 वर्षों में कई बार विभाग से लिखित शिकायत की जा चुकी है। इसके बाद भी नलकूप दुरुस्त नहीं कराया जा रहा है। निजी संसाधन से सिंचाई करने पर लागत बढ़ रही है।
मरम्मत के बाद पांच दिन चला फिर हो गया खराब
मिरचौड़ी के मजरा धराहटी में स्थापित नलकूप सांख्य-295 लगभग पांच वर्षों से खराब है। कई बार शिकायतों के बाद छह महीने पूर्व दुरुस्त कराया गया था। महज पांच दिन ही चल पाया और फिर से खराब हो गया। किसान सतेन्द्र प्रताप सिंह व सुखराम सिंह ने बताया कि इन दिनों गन्ना व उरद आदि की फसल को पानी की जरूरत है। नलकूप खराब होने से निजी संसाधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
एक साल से परती पड़ा है खेत
कठेला गांव में स्थापित नलकूप संख्या-97 एक साल से खराब है। किसान रामू ने बताया कि मेरा खेत पास में ही है लेकिन नलकूप खराब होने से पानी के अभाव में कोई फसल नहीं बो पाया है। निजी बोरिंग नहीं है, दूसरे किसानों का नलकूप काफी दूरी पर है। इसलिए एक साल से करीब तीन बीघा खेत परती पड़ा है।