इस नीति के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों, प्राकृतिक संपदाओं और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार की मंशा ग्रामीण पर्यटन को विकसित व प्रोत्साहित कर पर्यटकों के प्रवास और रोजगार के मौके में इजाफा करना है।
इससे जहां ग्रामीणों का शहर की ओर पलायन रुकेगा, वहीं ग्रामीण क्षेत्र का समुचित विकास होगा।
पर्यटन के माध्यम से गांवों में बुनियादी सुविधाओं, स्वस्थ वातावरण व जीवन शैली में सुधार के अलावा ग्रामीण परिवेश के कलाकारों का सामाजिक और आर्थिक उन्नयन हो सकेगा।
ग्रामीण पर्यटन के लिए जिन गांवों का चयन होगा, उस गांव को सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा गांव में पर्यटन से जुड़ाव को लेकर विभिन्न विभागों द्वारा कई तरह के काम भी कराए जाएंगे।
इस नीति के तहत ग्रामीण पर्यटन प्रबंध समिति बनाई जाएगी। समिति में डीएम, सीडीओ, उपायुक्त उद्योग, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, सबंधित बीडीओ, प्रधान व गैर सरकारी परियोजना सलाहकार शामिल होंगे। यह समिति पर्यटन स्थल का चयन कर वहां के विकास की रूपरेखा तैयार करेगी। साथ ही मासिक बैठक कर कार्यों की समीक्षा करेगी।
चयनित गांव को वित्तीय सहायता के रूप में राज्य सरकार द्वारा एक करोड़ की धनराशि मुहैय्या कराई जाएगी। एक वित्तीय वर्ष में जिले में तीन गांव ही चयनित किए जाएंगे। इस लिहाज से जिले को एक वित्तीय वर्ष में तीन करोड़ बजट मिलेगा। जिससे चयनित गांव में पर्यटकों को आकर्षित करने वाले विकास कार्य कराए जाएंगे।