बाघ पकड़ने के लिए लगाया गया पिंजरा।
कमलापुर (सीतापुर)। सरायन और गोन नदी की तलहटी का जंगल एक माह से बाघ का ठिकाना बना हुआ है। सोमवार रात बाघ की दहाड़ से चंदोखा व बसईडीह के लोगों की नींद उड़ गई। सुबह छह बजे तक बाघ की दहाड़ सुनाई देती रही। खौफजदा ग्रामीण गांव से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। बच्चे स्कूल नहीं गए और घरों में कैद रहे। वन विभाग की टीम ने मंगलवार को इलाके में कांबिंग की और बाघ को पकड़ने के लिए चंदोखा में पिंजरा लगाया है। सिधौली वन रेंज में गोन और सरायन नदी का किनारा लगभग एक माह से टाइगर सफारी बना हुआ है। सबसे पहले महेशपुर, सरौराकलां में बाघ ने आमद दर्ज कराई। इसके बाद केसरिया, बनघुसरी, गंगापुर, बेहड़ा फिर हरिहरपुर, गोविंदापुर, हरदोपट्टी में बाघ की चहलकदमी सामने आई। दाऊदपुर में एक गोवंश को शिकार किया। गत सोमवार शाम बाघ की आमद चदोखा गांव में हुई। बाघ के हमले में पांच बकरियों की मौत हो गई, जबकि एक बकरी को वह दबोच ले गया। चंदोखा के पंकज ने बताया कि जंगल में सोमवार रात बाघ दहाड़ता रहा। उसकी दहाड़ से लोगों की नींद उड़ गई। दुर्जनलाल ने बताया कि सुबह छह बजे फिर बाघ की दहाड़ सुनाई दी। सहमे ग्रामीण गांव से बाहर नहीं जा रहे हैं। बच्चे डर के मारे स्कूल नहीं गए। सियाराम ने बताया कि कोई खेत नहीं जा रहा है।