नैमिषारण्य क्षेत्र के हड़हा गांव में बाघ के पगचिह्न मिलने से रविवार को दहशत फैल गई। सूचना पर डीएफओ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। करीब पांच घंटे में चार किमी. तक खाक छानने के बाद भी टीम के हाथ कुछ नहीं लगा।
हालांकि दो दिनों से लगातार पगचिह्न मिलने पर बाघ के गोमती नदी की तलहटी के झुरमुटों में ही मौजूद होने की प्रबल संभावना बनी हुई है। उधर, रविवार को नए पगचिह्न मिलने के बाद बाघ के हरदोई जनपद की सीमा में चले जाने का वन विभाग का दावा हवा हवाई साबित हुआ।
शनिवार को ही संदना इलाके में बाघ की मूवमेंट दिखी थी। अब पगचिह्न नैमिष क्षेत्र में मिलने से लोग डरे हुए हैं। मिश्रिख वन क्षेत्र अंतर्गत प्रसिद्ध तीर्थ नैमिषारण्य के करीब हड़हा मजरा ठाकुर नगर में रविवार सुबह ग्रामीणों को खेतों में बाघ के पगचिह्न दिखे।
इलाके में बाघ की मौजूदगी का पता चलते ही ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सूचना पर दोपहर बाद जिला वनाधिकारी अंबिका प्रसाद त्रिपाठी व वन क्षेत्राधिकारी राकेश चौधरी वन रक्षकों के साथ मौके पर पहुंचे।
वन विभाग की टीम ने हरदोई-सीतापुर मार्ग के किनारे बसे हड़हा गांव से लेकर अजीजपुर तक करीब चार किमी. के दायरे में खेतों व आसपास बाघ की तलाश की। करीब पांच घंटे तक कॉम्बिंग के बाद भी बाघ का कोई सुराग नहीं लग सका।
वन विभाग ने संभावना जताई कि शनिवार को संदना क्षेत्र से होते हुए वह इस ओर पहुंचा है। इसके अलावा टीम ने नदी पार कर बाघ के हरदोई जनपद की सीमा में चले जाने की संभावना भी जताई है।
वन रक्षकों की एक टीम को निरंतर इस क्षेत्र की मानीटरिंग के लिये निर्देशित किया गया है। वन विभाग के अफसरों ने ग्रामीणों से भी सतर्क रहने की बात कही है।
साढ़े तीन साल के बाघ के हैं पगचिह्न
खेतों में मौजूद पगचिह्न का टीम ने काफी गहराई से निरीक्षण किया। विभागीय अफसरों ने पगचिह्न के हिसाब से अनुमान लगाया है कि बाघ की उम्र लगभग साढ़े तीन वर्ष है। टीम के मुुताबिक बाघ ने अभी तक किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है। वह भटककर आबादी की ओर आ गया है।
हाईवे पार न कर पाने से वापस आया
वन विभाग के मुताबिक पीलीभीत के जंगलों से भटककर बाघ इधर पहुंचा है। पीलीभीत के जंगलों से होकर नदी इस इलाके की ओर आती है।
नदी की तलहटी पकड़कर वनराज यहां आ पहुंचा। अफसरों ने यह भी आशंका जताई कि यह वही बाघिन हो सकती है जो पिछले साल सितंबर-अक्तूबर में लखनऊ के माल व सीतापुर के संदना इलाके में दिखी थी। जिसके बाद काम्बिंग कर उसे शाहजहांपुर की सीमा तक भगा दिया गया था। शायद हाईवे पार न कर पाने से बाघिन वापस लौट आई है।