टीम के मुताबिक शुक्रवार रात भर बाघ ने करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय की। जिले की सीमा के पार जाने के बाद टीम भी वापस लौट गई।
शनिवार को संदना में जंगली जानवर देखे जाने की खबर के बीच अगले दिन ही रविवार को नैमिषारण्य के हड़हा गांव में बाघ के पगचिह्न मिले थे। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसकी तलाश शुरू की। करीब 15 किलोमीटर का सफर तय कर बाघ बुधवार को पिसावां क्षेत्र में दिखा।
यहां भी उसने वनरोज का शिकार किया। इस बीचकुतुबनगर में खारझा के निकट वह खेतों में छिपकर बैठ गया था। खेतों में छिपते ही वन विभाग की टीम ने भी उसी स्थान के करीब डेेेेरा डाल दिया था। तीन दिन बीतने के बाद बाघ शुक्रवार रात खेतों से बाहर निकला।
शनिवार सुबह रेंजर एके सिंह के नेतृत्व में कैंप कर रही टीम पगचिह्नों को तलाश करते हुए आगे बढ़ी। टीम के मुताबिक हरनी खुर्द, हरनी कला, झरकुंआ, ढखिया के निकट खेतों में उसके पगचिह्न मिले। इसके बाद गोमती नदी पड़ती है। नदी पार हरदोई जिले के मरदान गांव तक भी उसके पगचिह्न दिखे हैं।