सीतापुर। गांजर इलाके में उफनाई सरयू नदी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। कई जगह नदी का पानी किनारों से बाहर निकलकर बहने लगा है। रेउसा व रामपुर मथुरा क्षेत्र के तीन आशियाने सरयू की बेकाबू लहरों में समा गए हैं। उधर, शारदा नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। तेज हवाओं के साथ उठ रही ऊंची लहरों को देख ग्रामीण भयभीत हैं।
तटीय इलाकों में हड़कंप मच गया है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों ने गृहस्थी समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है। हालांकि अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं, लेकिन सरयू व शारदा के जलस्तर में इसी तरह बढ़ोत्तरी होती रही तो किसी भी समय बाढ़ की विनाशलीला शुरू हो सकती है।
ब्लॉक रेउसा इलाके में कोनी, फौजदार पुरवा, मेवडी छोलहा, श्रीराम पुरवा आदि गांवों की तरफ सरयू का पानी बढ़ने लगा है। समयदीन पुरवा और कोनी के रामनिवास व जागेश्वर के आशियाने रविवार को सरयू में समा गए। गनीमत ये रही कि खतरा भांपकर यह लोग पहले ही पलायन कर गए थे, इसलिए बड़ा हादसा टल गया।
वहीं, तटीय क्षेत्र में रहने वाले बाशिंदे सरयू का रौद्र रूप देखकर सुरक्षित ठिकाने तलाशने लगे हैं। अपनी गृहस्थी समेटकर सड़क के किनारे ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। त्यागी महराज के आश्रम के निचले भूभाग में पानी फैलने लगा है। उधर, ब्लॉक रामपुर मथुरा के अंगरौरा गांव में सरयू ने कटान शुरू कर दिया। रविवार को अंगरौरा निवासी शत्रोहन का मकान नदी में समा गया। बाढ़ की आशंका से तटवर्ती गांवों के बाशिंदे सहमे हुए हैं।
चहलारी घाट से गनेशपुर तक बने 54 किमी. के बांध पर बारिश के कारण जगह-जगह खतरनाक रेनकट हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि तत्काल रेनकट दुरुस्त नहीं कराए गए तो बांध का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। ऐसी दशा में सैकड़ों गांवों पर बाढ़ का संकट उत्पन्न हो सकता है।
एसडीएम बिसवां सुरेश कुमार ने बताया कि नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुई है, लेकिन अभी बाढ़ के कोई हालात नहीं हैं। फिर भी लेखपालों व प्रधानों को बराबर सतर्क रहने के निर्देेश दिए गए हैं। प्रशासन कटान रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।