नैमिषारण्य 88 हजार ऋषियों द्वारा तपस्या से अभिसिंचित पावन तपोभूमि है। यहां आकर भागवत कथा सुनने से पिछले अनेकों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। पौष माह में इस पावन धरा पर कथा श्रवण से पित्रों को मुक्ति मिलती है।
हनुमान गढ़ी कथा मंडप में श्रीमद्भागवत कथा का आरंभ करते हुए वृंदावन से पधारे कथा व्यास पीयूष कांत महाराज ने यह बात कही।
परम संत गया प्रसाद महाराज फाउंडेशन ट्रस्ट वृंदावन की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का सोमवार को विधिवत शुभारंभ हुआ। इस दौरान हनुमान गढ़ी मंदिर में महंत पवनदास द्वारा पोथी पूजन कर हनुमान जी के सानिध्य में पोथी यात्रा निकाली गई।
पोथी को शीश पर धारण कर श्रद्धालु नाचते-गाते चक्त्रस्तीर्थ एवं विभिन्न मंदिरों में होते हुए पुन: कथा पंडाल में पहुंचे, जहां विद्वान आचार्यों द्वारा व्यास पूजन कर पोथी स्थापना करवाई गई। जिसके बाद कथा प्रवक्ता पीयूष कांत महाराज ने कहा कि तीर्थ नैमिषारण्य में कथा सुनाने का मुझे दूसरी बार अवसर प्राप्त हुआ है।
यह परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक साधक को तीर्थ में निवास करते समय इस बात का स्मरण रखना चाहिये कि जितना हो सके भगवान का भजन एवं नाम जप करें। संसार की मिथ्या चर्चाओं से दूर रहना चाहिए। कथा व्यास ने कहा कि व्यक्ति को यदि सद्गुरु का आश्रय मिल जाए तो जीने का सही ढंग आ जाता है।