सीतापुर। महोली के नरनी गांव में सौरभ दीक्षित को निवाला बनाने के बाद बाघ सोमवार भोर फिर से गांव के पास पहुंचा। करीब चार दिन बाद वापस लौटे बाघ के पगचिह्न वन विभाग के अधिकारियों को पिंजरे के पास दिखे हैं। यह वहीं पिंजरा है, जिसमें बकरी को बांधा गया है। डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि पिंजरे के तीन मीटर के आस पास पगचिह्न मिले हैं। ये प्रथम दृष्टया बाघ के ही लग रहे हैं। हालांकि, बाघ ने पिंजरे में बंधी बकरी को नुकसान नहीं पहुंचाया है। बाघ को ट्रैप करने की योजना पर काम जारी है। सोमवार रात को भी दस विशेषज्ञ अलर्ट मोड पर रहेंगे।
डीएफओ नवीन खंडेलवाल के अनुसार दो मचानों के अलावा दो पिंजरे भी लगाए गए हैं। एक पिंजरे को नरनी में घटनास्थल के पास रखा गया है। यहां बकरी बांधी गई है। दूसरे पिंजरे को ढाई किलोमीटर के क्षेत्र में रखा गया है। वहीं, एक मचान पीएचसी पर बनाई गई है। यहां पड़वा बांधा गया है। बाघ इनमें से किसी एक जगह भी आएगा तो वन विभाग के रडार पर आ जाएगा। टीम बाघ को ऐसी जगह ट्रैंकुलाइज करना चाहती है, जहां पानी न हो। साथ ही झाड़ियां भी कम हों। अन्यथा प्रयास विफल होने का खतरा रहता है।