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Sitapur News: पंखे की रफ्तार से जहाज नहीं भर सका उड़ान और खिल गया कमल

Tue, 16 May 2023 12:38 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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खैराबाद/सीतापुर। नगर पालिका के चुनाव में पंखे की रफ्तार से जहाज उड़ान नहीं भर पाया और कमल खिल गया। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में पहली बार भाजपा की जीत की नींव निर्दलीय प्रत्याशी गुलशन जहां ने तैयार की। किसी भी वार्ड में पंखे की रफ्तार इतनी धीमी ही नहीं हुई कि जहाज उड़ान भर पाता। पंखा निशान पर चुनाव लड़ने वाली गुलशन जहां को 5072 मत मिले हैं। गुलशन जहां ने जहाज निशान पर लड़ने वाली राजिया बेगम के वोट बैंक में तगड़ी सेंध लगा दी। यही कारण है कि राजिया बेगम भाजपा की बेबी गुप्ता से 528 मतों से हार गईं। लिहाजा, मुस्लिम बाहुल्य वाली नगर पालिका में पहली बार जीत दर्ज कर भाजपा ने इतिहास रच दिया है।
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नगर पालिका खैराबाद में महिला के लिए आरक्षित अध्यक्ष सीट पर पांच प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। भाजपा ने बेबी गुप्ता पर दांव लगाया था। सपा से पूर्व अध्यक्ष हाजी जलीस अंसारी की बेटी इरम अंसारी और आईएमआईएमआई से वरीशा चुनाव लड़ रही थीं। पूर्व अध्यक्ष हनीफ अंसारी की पत्नी राजिया बेगम और गुलशन जहां निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर किस्मत आजमा रही थीं।
यहां भाजपा की बेबी गुप्ता और निर्दलीय राजिया बेगम के बीच आमने-सामने का कड़ा मुकाबला माना जा रहा था। सियासी चाणक्यों का यह भी कहना था कि सपा प्रत्याशी इरम अंसारी मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती हैं। क्योंकि 2017 में इरम के पिता जलीस अंसारी सपा के टिकट पर अध्यक्ष बने थे। हांलाकि राजनैतिक पंडितों के समीकरण तब उलट पुलट गए जब मतगणना के रुझान आना शुरू हुए। निर्दलीय प्रत्याशी गुलशन जहां ने उम्मीद से कहीं बढ़कर प्रदर्शन किया। हर वार्ड में पंखा चलता रहा। पंखे की चाल ने राजिया के जहाज को उड़ने ही नहीं दिया। पंखे ने जहाज के वोटबैंक में तगड़ी सेंध लगा दी। लिहाजा, कुल 5072 मत पाने वाली गुलशन जहां ने भाजपा के बेबी गुप्ता की जीत का मार्ग प्रशस्त कर दिया। बेबी गुप्ता ने 9162 मत पाए और 8634 मत पाने वाली निर्दलीय राजिया बेगम को 528 मतों से हरा दिया।
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अध्यक्षी जीती, सभासदी में भाजपा का प्रदर्शन रहा खराब
नगर पलिका के 25 वार्डों में से भाजपा ने नौ वार्डों में सभासद के प्रत्याशी उतारे थे। जबकि 12 वार्डों में प्रत्याशियों को समर्थन दिया था। सिंबल पर चुनाव लड़े नौ प्रत्याशियों में से महज तीन जीत सके हैं। उधर, समर्थन से लड़ने वाले 12 मेंबरों में से छह जीत दर्ज कर पाए हैं। माना जा रहा है, कि अगर भाजपा का जादू चलता तो सभासद के चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन बेहतर होता।
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