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देश व विदेशों में भी ‘नूरी’ के दीवाने

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सीतापुर/ कमलापुर। इन दिनों जिले के आम का डंका दिल्ली में भी बज रहा है। दिल्ली की आजाद नगर मंडी में कमलापुर की बागों का आम हाथों हाथ बिक रहा है। इसे मंडी में नूरी नाम से जाना जाता है। मंडी के आढ़ती आम को सीधे बगीचे से ले जाते हैं। देश-विदेश में भी नूरी के कई लोग दीवाने हैं।
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जिले में कमलापुर आर्थिक और भौगोलिक तौर पर बहुत ही समृद्ध रियासत रही है। इस रियासत के कई बगीचे हैं। इनमें एक हजारा बाग भी है। इस बाग में आम का बेहतर उत्पादन होता है। बगीचे का आम टूटने लगा है। इन दिनों दिल्ली की आजाद नगर मंडी में इस बगीचे के आम की मांग जोरों पर है। एडवांस बुकिंग का चल रही है।
बागवान मकसूद अहमद बताते हैं कि कमलापुर की बाग का आम दिल्ली में नूरी नाम से बिकता है। आजाद नगर मंडी के आढ़ती सीधे बाग से ही आम उठा लेते हैं। बाजार बेचने नहीं जाना पड़ता। रेट भी अच्छा मिल जाता है।
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विदेश भी जाता है यहां का आम
सीतापुर का आम देश के कोने-कोने में मिठास घोलने के साथ विदेशियों की जुबान को भी रसीला करता है। कोरोना महामारी के चलते पिछले साल से आम का आपूर्ति विदेशों को नहीं हो पा रही है। आम निर्यात से जुड़े मोहम्मद आमिर और मकसूद अहमद बताते हैं कि गल्फ देशों में जिले के आम की काफी मांग रहती है।
एक निश्चित मात्रा में अमेरिकी और यूरोपियन देशों में इसकी सप्लाई होती है। कोरोना महामारी के चलते पिछले वर्ष से निर्यात बंद है। इससे आम के बागवानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
18,500 हेक्टेयर में होती है बागवानी
जिले में आम के बगीचों का रकबा अच्छा खासा है। खैराबाद, कमलापुर, रामकोट, मिश्रिख, महमूदाबाद आदि क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी बाग हैं। इनका कुल रकबा 18,500 हेक्टेयर है।
इस बार मिश्रिख और महमूदाबाद बेल्ट में फसल कमजोर आई है। रामकोट बेल्ट में फसल जोरदार है। अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आम तोड़ा जाने लगा है। हालांकि, अभी लोकल मार्केट में जिले का आम बहुत कम आ रहा है। अधिकतर आम गैर राज्यों को ही सप्लाई किया जा रहा है।
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