सीतापुर/नैमिषारण्य। चंद्र ग्रहण का सूतक काल लगने पर रविवार दोपहर शहर व नैमिषारण्य में मंदिरों के कपाट बंद गए। इसके बाद से मंदिरों में सन्नाटा दिखाई दिया। चंद्र ग्रहण का स्पर्श रात 9:57 बजे है। इसकी अवधि साढ़े तीन घंटे रही। सोमवार की ब्रह्मबेला में गंगाजल से शुद्धिकरण के बाद अब मंदिरों के कपाट खोले जाएंगे।
पितृपक्ष के पहले दिन चंद्र ग्रहण का संयोग रहा। इससे ग्रहण के सूतक काल 12:57 बजे प्रारंभ हो गया। शहर के श्यामनाथ मंदिर, जंगलीनाथ मंदिर, बड़ा हनुमान मंदिर, संतोषी माता और दुर्गा मंदिर आदि सूतक काल लगते ही बंद कर दिए गए। इसी क्रम में नैमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी मंदिर, चक्रतीर्थ स्थित भूतेश्वर नाथ मंदिर, कालीपीठ, हनुमान गढ़ी, बालाजी मंदिर, त्रिशक्ति धाम, व्यास गद्दी, सूत गद्दी के साथ तीर्थ के सभी मंदिरों के कपाट विधि-विधान से पूजन के बाद बंद कर दिए गए।
चक्रतीर्थ के प्रधान पुजारी राज नारायण पांडेय ने बताया कि सोमवार सुबह पांच बजे पहले गंगाजल से मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके उपरांत शृंगार आरती की जाएगी, फिर दर्शनाथ कपाट खोल दिए जाएंगे। काली पीठाधीश्वर गोपाल शास्त्री ने कपाट बंद करने से पहले माता काली का विधि-विधान से पूजन किया। महंत भास्कर शास्त्री ने बताया कि सूतक काल से ग्रहण के मोक्ष तक पूजा-पाठ वर्जित रहता है, इसलिए मंदिरों के कपाट बंद किए गए हैं।