रेउसा/रामपुर मथुरा। पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर मैदानी इलाकों पर भी दिखाई देने लगा है। शारदा व सरयू नदी में बरसात का पानी आने से जलस्तर अचानक बढ़ गया है। सोमवार को बैराजों से 2.73 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। इससे रामपुर मथुरा के अखरी गांव के अस्तित्व पर ही संकट गहरा गया है। वहां 15 घरों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है।
रेउसा इलाके में फौजदापुरवा के प्राथमिक विद्यालय की बाउंड्रीवाल पर लहरें थपेडे़ मार रही हैं। स्कूल के कटने का भी खतरा बन गया है। करीब 10 परिवार घर तोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। तराई इलाके में शारदा व सरयू नदी बह रही है। जिले में लहरपुर, बिसवां व महमूदाबाद तहसील हर बार बाढ़ की चपेट में आ जाती है।
बिसवां तहसील का फौजदारपुरवा सबसे प्रभावित गांव है। करीब 20 दिन पहले जलस्तर में वृद्धि होने से यहां के तमाम परिवार पलायन कर चुके है। इस समय गांव में 10 परिवार रह रहे हैं। सोमवार को लखीमपुर के शारदा बैराज से 1.42 लाख व सरयू बैराज से 1.31 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे नदियों का जलस्तर काफी बढ़ गया है।
प्राथमिक विद्यालय फौजदारपुरवा की बाउंड्रीवाल के किनारे पानी पहुंच गया है। इससे स्कूल कटने का खतरा उत्पन्न हो गया है। जबकि भिखारीलाल, त्रिभुवन, रामसहारे, श्रीकेशन, रामसनेही, जनकलाल व जगदीश कटान के डर से अपने घर तोड़ रहे है। अब यह दुर्गापुरवा व आशारामपुरवा के कच्चे मार्गों पर अपने आशियाने बनाने शुरू कर दिए है। इन लोगों का कहना है कि जब स्कूल के पास पानी आ गया है तो पता नहीं कब गांव में पानी पहुंच जाए। इसी वजह से यहां से पलायन करना मजबूरी है।
अखरी गांव के संपर्क मार्गों पर भरा पानी
महमूदाबाद तहसील का अखरी गांव कटान प्रभावित है। यहां पर नदी के जलस्तर में करीब 40 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। अचानक पानी बढ़ने से गांव के लोग भयभीत हैं। कटान तेज होने से अखरी गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। गांव में आवागमन पूरी तरह समाप्ति की कगार पर पहुंच रहा है। कई मार्गों पर पानी आ गया है।
लेखपाल रविन्द्र ने बताया कि बचाव कार्य किये जा रहे है। अभी नदी अखरी गांव के पास खेतों में तेजी से कटान कर रही है। जलस्तर खतरे के निशान से करीब एक मीटर नीचे है। इससे गांव के पवन, ओम प्रकाश, संतलाल, संजय, जुगुल किशोर, रमेश बाबू, नरेंद्र आदि सहित करीब 15 परिवारों पर कटान का खतरा उत्पन्न हो गया है।
केवल कागजों पर हो रहा काम
रामपुर मथुरा/सीतापुर। महमूदाबाद तहसील का अखरी गांव कटान का केंद्र बना हुआ है। इस गांव के अस्तित्व को बचाने के लिए सिंचाई विभाग व प्रशासन एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। ड्रेजिंग व चैनलाइजेशन सहित ठोकरों के नाम पर भी करोड़ों रुपये पानी में बहाए जा रहे हैं। लेकिन कटान का रुख आज भी इसी गांव की ओर बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब बड़े-बड़े पत्थर, बोल्डर पानी के बहाव की दिशा नहीं बदल सके तो पेड़ की डाल और झाड़ी पानी की दिशा बदलने में कितनी भूमिका निभाएगी। यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
निरीक्षण करने आए जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज के निर्देश के बाद कार्य में कुछ तेजी अवश्य आई थी। ग्रामीणों को कहीं जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन बाढ़ खंड बाराबंकी द्वारा कार्य को मुश्किल से एक सप्ताह तक कराया गया और उसके बाद बंद कर दिया गया। वर्तमान में कार्य बंद चल रहा है। इससे ग्रामीण बहुत परेशान है।
ग्रामीणों को किया अलर्ट
नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। अभी बाढ़ का खतरा नहीं है। बचाव के कार्य किए जा रहे हैं। जलस्तर बढ़ने के कारण ग्रामीणों को अलर्ट कर दिया गया है।
- अनुपम मिश्रा, एसडीएम, बिसवां
शारदा व सरयू नदी का जलस्तर एक सप्ताह तक बढ़ते रहने की संभावना है। कम्हरिया शेखुपूर, जटपुरवा, अपस्ट्रीम, फौजदारपुरवा व परमेश्वरपुरवा में बाढ़ बचाव के कार्य कराए जा रहे हैं। सभी संवेदनशील स्थलों पर पर्याप्त सामग्री खाली सीमेंट बैग, नायलॉन क्रेट व बम्बू क्रेट रखवा दिए गए है। संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण किया जा रहा है।
- विशाल पोरवाल, अधिशाषी अभियंता, सीतापुर प्रखंड, शारदा नहर