शहर में घनी आबादी के बीच खड़े कई जर्जर व खस्ताहाल भवन
बारिश में कही धराशायी न हो जाए जर्जर इमारतें, प्रशासन अंजान
सीतापुर। निष्प्रयोज्य घोषित हो जाने के बाद भी घनी आबादी के बीच खड़े जर्जर व खस्ताहाल भवनों में लोग गुजर बसर कर रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ भवनों में दरारे पड़ जाने के बाद भी सरकारी कार्यालय संचालित हो रहे हैं। ऐसे बदहाल व जर्जर भवन बरसात में कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। इन भवनों में रहने वालों के साथ ही आस पास के लोग भी बारिश के दौरान इनके धराशायी हो जाने की आशंका से भयभीत हैं। दूसरी तरफ जिला प्रशासन व नगर पालिका के जिम्मेदार इससे पूरी तरह अंजान बने हैं। इनमें से कई इमारतें तो अंग्रेजों के समय की बनी हैं। रुक-रुक कर हो रही तेज व धीमी मानसूनी बारिश ऐसी इमारतों के लिए खतरा बनी हुई है।
आर्य नगर की बिल्डिंग में टूट चुका छज्जा
शहर के स्थित आर्य नगर पुतवा ठेकेदार के पास की पुरानी बिल्डिंग का छज्जा गिरकर टूट चुका है। केवल उनमें ईंटें ही किसी तरह से लटक रही हैं। ऐसे में कभी भी यह बिल्डिंग धराशायी हो सकती है। इसी तरह विजय लक्ष्मी नगर में चांदी वाले हनुमान मंदिर के पास वाली गली की पुरानी इमारत भी काफी जर्जर व खस्ताहाल हो चुकी है। तामसनेगंज मोहल्ले में छोटी एचकेपी स्कूल के सामने की बिल्डिंग भी ऊपर से पूरी तरह से क्षतिग्रस्त खड़ी है जबकि गुरुद्वारा के पास की इमारत से भी अधिकांश ईंटें धीरे-धीरे कर अलग हो रहे हैं।
जान हथेली पर रखखर काम कर रहे कर्मचारी
शहर के गुरुद्वारा मार्ग पर स्थित फाइलेरिया व मलेरिया इकाई का कार्यालय भी काफी पुरानी इमारत व पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी इमारत में ही संचालित हो रहा है। इससे यहां काम कर रहे कर्मचारियों को भी बारिश के दौरान जान हथेली पर रखकर काम काज करना पड़ता है। जर्जर इमारत में हल्की सी बारिश होने पर छतों से पानी टपकने लगता है। कुछ इसी तरह का हाल जिला श्रम कार्यालय का भी है। इस भवन में कई जगह दरार भी पड़ चुकी हैं। जिला खाद्य आपूर्ति के कार्यालय भवन के भी कई हिस्सों में दरार पड़ चुकी हैं।
दहशत में जाग कर कट रहीं रातें
मोहल्ला आलम नगर में मुख्य सड़क पर स्थित दो मंजिला और तीन मंजिला जर्जर भवन बने हुए हैं। बारिश के दौरान इन घरों के लोगों की रातें जागते हुए भय के साथ कट रही हैं। इसी तरह लोहारबाग, नईबस्ती, दुर्गापुरवा सहित कई अन्य मोहल्लों में जर्जर इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। जर्जर खड़ी इन इमारतों के पास से गुजरने में भी डर लगता है।
नगरपालिका प्रशासन को इस संबंध में पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि जर्जर भवनों को चिन्हित कर लोगों को सचेत कर वहां से हटाए। यह जिम्मेदारी नगरपालिका की है कि ऐसे जर्जर व खस्ताहाल हो चुके भवनों को खाली कर उनका ध्वस्तीकरण कराए। इस कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नही होगी। साथ ही संबंधित से जवाब तलब भी होगा।
-राम भरत तिवारी, अपर जिलाधिकारी, सीतापुर