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Sitapur News: रोजगार सेवक की फर्म पर बरसी अफसरों की कृपा

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सीतापुर। डीएम-सीडीओ ही नहीं शासन के निर्देशों को भी धता बताकर ब्लॉक स्तर के अफसरों ने खूब मनमानी की। हरगांव विकास खंड में तैनात एक रोजगार सेवक की फर्म पर भी अफसरों ने खूब कृपा बरसाई। न सिर्फ मनरेगा के सामग्री अंश का बल्कि कई ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त के कार्यों का भुगतान भी रोजगार सेवक की फर्म को किया गया।
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शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि पंचायत राज और ग्राम्य विकास विभाग के किसी भी कर्मचारी(स्थाई/संविदा) या उसके रिश्तेदार की फर्म को मनरेगा और पंचायत से कोई कार्य न दिया जाए। इन फर्मों को कोई सरकारी भुगतान न करने के भी निर्देश हैं। इसी तरह के निर्देश पंचायत प्रतिनिधियों के लिए भी हैं। शासन के इन निर्देशों का पालन कराने की जिम्मेदारी मनरेगा उपयुक्त और खंड विकास अधिकारियों की है। पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की भी है।
बावजूद इसके खंड विकास अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। ताजा मामला हरगांव विकास खंड का है। इसी ब्लॉक में सर्वेश कुमार रोजगार सेवक के पद पर तैनात है। सर्वेश की फर्म वर्मा सप्लायर के नाम से है। इस फर्म को बीती 29 दिसंबर को ही दस लाख रुपये से अधिक का भुगतान मनरेगा के सामग्री अंश से किया गया है। इससे इतर ग्राम पंचायतों को मिलने वाले 15वें वित्त के बजट से भी इस फर्म को अलग अलग ग्राम पंचायतों से भुगतान किया गया है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में आठ लाख रुपये से अधिक और दूसरी तिमाही साढ़े 23 लाख रुपये से अधिक का भुगतान विभिन्न मदों से इस फर्म को किया गया है।
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.....और यह खेल भी किया
अमर उजाला ने समाचारों के जरिए कई कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की फर्में पंजीकृत होने का खुलासा किया। इसके बाद इन फर्मो से उपकृत होने वाले अधिकारियों ने संचालकों से बीच का रास्ता निकलवाने की कोशिश की। हरगांव में भी यही खेल हुआ। एक दिसंबर को रोजगार सेवक ने फर्म सरेंडर करा दी। फर्म जीएसटी विभाग में सरेंडर की लेकिन विभाग में नहीं। खाता संचालित होता रहा और यही वजह रही कि 29 दिसंबर को भी भुगतान उक्त फर्म को किया गया।
फर्मों का सत्यापन कराया जा रहा है। रोजगार सेवक की फर्म पंजीकृत नहीं की जानी चाहिए थी। फर्म को काम और भुगतान भी नहीं दिया जाना चाहिए था। विस्तृत जांच करवा कर कार्यवाई करेंगे।
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अक्षत वर्मा,सीडीओ
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