राबर्ट्सगंज बैंक आफ बडौदा में उपभोक्ताओं की लगी कतार।
500 व 1000 रुपये की नोटबंदी को 24 दिन है, बावजूद इसके कैश की किल्लत दूर होती नजर नही आ रही है। जिम्मेदार आरबीआई से नई नोटों का अगली खेप न आने की बात कह रहे हैं। शनिवार को भी जिले की सभी बैंके कैश के संकट से जूझती रहीं। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक भुगतान के लिए हाय तौबा मची रही है। हाल ऐसा था कि कहीं पर भुगतान की अधिकतम सीमा तय कर दी गई, तो कहीं पर भुगतान के लिए कैश ही मौजूद नही था।
बैंक के अधिकारी भी खुद को असहाय पा रहे थे। बैंक के अधिकारियों का पूरा दिन खाता धारकों को समझाते हुए बीता। वहीं एटीएम का हाल सबसे बुरा रहा। जिला मुख्यालय को छोड़ अन्य किसीं भी जगह पर एटीएम चलते नजर नही आए। शनिवार को बैंकों में करीब 25 करोड़ रुपये जमा हुए। जबकि 10 करोड़ रुपये के करीब भुगतान किया गया।
शनिवार को 10 बजे के करीब बैंक खुले तो हर कोई कैश निकालने के लिए बेताब नजर आ रहा था। जिला मुख्यालय पर स्टेट बैंक व इलाहाबाद बैंक समेत अन्य बैंकों में भुगतान के लिए खाता धारकों की लंबी लंबी लाइन लगी नजर आई। बैंक में अधिकतम राशि दस हजार तक निकालने की सीमा तय कर दी गई। वहीं खाता धारकों से कहा जाता रहा कि वे कम से कम रुपये निकालें, जिससे अधिक से अधिक खाता धारकों को भुगतान हो सके। इस दौरान जमा करने वाले खाता धारको की लाइन बेहद छोटी नजर आई। यहां पर स्टेट बैंक, इलाहाबाद बैंक समेत करीब 5 एटीएम चलते नजर आए।
महमूदाबाद, बिसवां, रेउसा, सिधौली, मिश्रिख, महोली, हरगांव, मछरेहटा, तंबौर आदि ग्रामीण क्षेत्र की बैंके कैश की किल्लत से जूझती रहीं। जिले भर में करीब 102 एटीएम मौजूद हैं। इनमें 11 एटीएम ही बमुश्किल कुछ देर के लिए चल सके। करीब 60 प्रतिशत एटीएम दुरुस्त कर दिए गए हैं, लेकिन कैश न आने से एटीएम में पर्याप्त कैश लोड नहीं हो पा रहा है। इससे एटीएम दुरुस्त होने के बावजूद नहीं चल पा रहे हैं।