अपर सत्र न्यायाधीश राम सुचित ने गैर इरादतन हत्या के एक मामले में दो सगे भाइयों समेत चार को दोषी ठहराते हुए दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषियों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गिरिंद्र पाल सिंह यादव ने की।
मिश्रिख के ग्राम चंदूपुर में 30 नवंबर 2011 की देर शाम आशुतोष अपने पिता करुणा शंकर, मां सरोजनी देवी व बहन राधा मिश्रा के साथ गांव के ही श्यामा कुमार के घर गया हुआ था। वहां से वापस लौटने पर भूमि विवाद में चल रही रंजिश के चलते गांव के ही राकेश मिश्रा व गुड्डू तथा मिश्रिख के ही गांव रन्नपूुर निवासी उसके साथी राजेश सुनार व दौलतपुर निवासी जयशंकर अपने हाथों में डंडा लेकर आ गए और करुणा शंकर समेत चारों पर हमला कर दिया।
इस घटना में करुणा शंकर को गंभीर चोटें आईं। सरोजनी देवी भी चोटिल हुई। इलाज के दौरान करुणा शंकर की मौत हो गई। इस प्रकरण में आशुतोष ने एक दिसंबर 2011 को मुकदमा दर्ज कराया था। जिसके बाद पुलिस ने न्यायालय में चारों के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या का आरोप पत्र प्रेषित किया। न्यायाधीश ने चारों को घटना का दोषी करार दिया और 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।