घाघरा नदी के जलस्तर में सोमवार से एक बार फिर से इजाफा होने लगा है, वहीं नदी तटीय क्षेत्रों में तेजी से कटान कर रही है। कुछ घर ढहकर नदी में समा गए तो कुछ घरों को लोग अपने हाथों से ही नेस्तनाबूद कर रहे हैं। जहां दस और मकान नदी में समा गए हैं, वहीं झोपड़ियां घाघरा में बहती नजर आ रही हैं। घाघरा का रौद्र रूप देखकर तटीय इलाके के बाशिंदे पलायन करने को मजबूर हैं। उधर, बैराजों से सोमवार को ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
रेउसा क्षेत्र के गोडिय़न पुरवा, दुर्गा पुरवा व पासिनपुरवा गांवों में घाघरा नदी तेजी से कटान कर रही है। रविवार की रात गोड़ियनपुरवा निवासी सागर, मिथलेश, रिंकू, शिवकुमार, उदयराज, पूरन, शिवदयाल, तीरथराम,रामभूखन, त्रिलोकी, राजू के घर घाघरा नदी में बह गए।
घाघरा के रौद्र रूप को देख, परिवार पहले से ही घरों का सामान समेटकर निकल चुके थे। रामगुलाम, बलराम, कृपाराम अपने पक्के मकानों को अपने हाथों से तोड़ रहे हैं। रामपाल, राजितराम, लखन, बलराम आदि किसानों की 16 बीघा खेती घाघरा नदी में कटकर बह गई है।
लोधपुरवा गांव में भी घाघरा नदी का कहर बरप रहा है। यहां के बुधराम,राधे, पाले के घर कटान के मुहाने पर हैं। इन घरों को परिवारों ने खाली कर दिया है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदों की माने तो नदी के जलस्तर में एक फिर से बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। नदी कटान तो कर ही रही है, लेकिन बाढ़ की नौबत दोबारा बन रही है।
क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों ने बजहा के निकट डेरा डाल रखा है। ये परिवार आवास भर की जमीन मिलने की राह तक रहे हैं। उधर घाघरा, बनबसा व शारदा बैराजों से सोमवार को 224925 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस पानी मात्रा काफी है, यही वजह है कि लोगों का मानना है, कि जिस दौरान यह पानी सीतापुर जिले से गुजरेगा, उस समय घाघरा नदी उफान मार सकती है और बाढ़ फिर से आ सकती है।
उधर घाघरा नदी के बीच टापू पर भी हलचल तेज है। घाघरा नदी टापू पर भी तेजी से कटान कर रही है। यही वजह है कि यहां के बाशिंदे टापू से सकुशल निकलने की जुगत लगा रहे हैं। टापू के दोनों तरफ करीब 5 से 7 किलोमीटर दूरी तक घाघरा नदी का पानी उफान मार रहा है। बेकाबू लहरें, टापू के बाशिंदों को डरा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उफान मारती घाघरा की लहरों के बीच नाव ले जाने खतरे से खाली नहीं है।