गांजर में हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। क्षेत्र के एक सैकड़ा के करीब गांव बाढ़ की चपेट में हैं। सबसे बड़ी तबाही रेउसा क्षेत्र में देखने को मिल रही है। जहां पर घाघरा नदी तेजी से कटान कर रही है। रविवार रात नदी निर्मल पुरवा गांव के दस घरों को निगल गई।
कटान से भयभीत पीड़ित अपने हाथों आशियाना मिटाकर पलायन की तैयारी कर रहे हैं। क्षेत्र के सात गांवों में घाघरा नदी कटान कर रही है। सोमवार को नदी के जलस्तर में मामूली गिरावट आई है।
बाढ़ग्रस्त निर्मल पुरवा में घाघरा तेजी से कटान कर रही है। गांव के ही फूलराम, मेवालाल, राम समुझ, लवकुश, शोभा, नरेश, बांके लाल, राजेश आदि के दस घर कटान में बह गए हैं। यहां रहने वाले अन्य लोगों ने खुद ही मकान तोड़ना शुरू कर दिया है।
हालत ये है कि पीड़ितों को रहने के लिए सुरक्षित स्थानों तक नहीं मिल रहा है। गांव के गुरु सहाय, रमाकांत, संतोष कुमार, निर्मलदास, राम लखन, रामदेव, राम हरख आदि ने घरों का सामान निकाल लिया है। इन घरों से करीब 10 मीटर दूरी की दूरी पर घाघरा नदी बह रही है।
क्षेत्र के लोधन पुरवा, गोड़ियन पुरवा, परमेश्वरदीन पुरवा, रामलाल पुरवा, प्रधान पुरवा व टापू पर बसे पचीसा गांव में घाघरा नदी कटान कर रही है। सारे रास्ते जलमग्न हैं और लोगों के घरों के अंदर तक बाढ़ का पानी मौजूद है। रामपुर मथुरा क्षेत्र में घाघरा नदी कहर बरपा रही है।
शुक्लन पुरवा, पंडित पुरवा, अंगरौरा व कनरखी गांव में घाघरा नदी कटान कर रही है। सोमवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 220295 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बाढ़ ग्रस्त इलाके में जहां राशन का संकट गहराता जा रहा है, वहीं पशुओं के सामने चारे का संकट आ रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को पशुओं के चारे का इंतजाम करने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।