सीतापुर। अंतरजनपदीय स्थानांतरण के तहत विद्यालय आवंटन की काउंसिलिंग में शिक्षक भड़क गए। विद्यालय आवंटन में पूरे जनपद के महज 150 विद्यालय खुलने से शिक्षकों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन कर काउंसिलिंग को रोक दिया। हंगामा देख कार्यालय के कर्मचारी सहम गए। सूचना पर कई थानों की पुलिस व एसडीएम सदर मौके पर पहुंचे। उन्होंने शिक्षकों से वार्ता की। शिक्षक स्कूलों की संख्या बढ़ाने की मांग पर अड़े रहे। बीएसए ने काउंसिलिंग प्रक्रिया जारी रखी। ऐसे में बहुत से शिक्षकों ने काउंसिलिंग कराई तो बहुत से शिक्षकों ने इंकार कर दिया। पूरे दिन कार्यालय में हंगामा चलता रहा।
अंतरजनपदीय स्थानांतरण के तहत जिले से करीब 1400 शिक्षक दूसरे जिले के लिए कार्यमुक्त हो चुके हैं। अन्य जनपदों से जिले में महज 326 शिक्षक आए है। इन शिक्षकों की ज्वॉइनिंग के बाद शनिवार को विद्यालय आवंटन के लिए काउंसिलिंग होनी थी। इसके लिए सभी शिक्षकों को सुबह 10 बजे बीएसए कार्यालय पर बुलाया गया था। शिक्षकों ने पहुंचकर सबसे पहले स्कूलों की लिस्ट देखी। उसमे महज 150 विद्यालय ही खोले गए थे।
वह भी दूरदराज ब्लॉक के विद्यालय खुले थे। इससे शिक्षक भड़क गए। वह विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की मांग करने लगे। इससे सभी शिक्षकों ने काउंसिलिंग प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया। करीब 200 शिक्षक बीएसए कार्यालय के गेट के सामने ही बैठ गए। मामला बढ़ता देख बीएसए ने इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी। उसके बाद एसडीएम सदर अमित भट्ट, इंस्पेक्टर टीपी सिंह सहित कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची।
अफसरों ने हंगामा शांत कराते हुए बीएसए से शिक्षकों की वार्ता कराई। बीएसए ने कहा कि ये विद्यालय के विकल्प शासन स्तर से खोले गए हैं। काउंसिलिंग कराने के निर्देश मिले हैं। इसमें जिले स्तर से कुछ भी नहीं हो सकता है। लेकिन शिक्षक अपनी मांग पर अड़े रहे। उसके बाद काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू हुई। यह पूरा घटनाक्रम दिनभर चलता रहा। शाम छह बजे तक शिक्षक गेट पर ही डटे रहे। इससे कार्यालय के अन्य कर्मचारियों में दहशत फैली रही।
दो गुट में बंटे शिक्षक
शिक्षकों का यह प्रदर्शन दो गुट में बंट गया। एक तरफ शिक्षक पूरी काउंसिलिंग का बहिष्कार धरना प्रदर्शन कर रहे थे, तो दूसरे गुट के शिक्षक काउंसिलिंग करा रहे थे। ऐसे में जब कोई शिक्षक अंदर से काउंसिलिंग कराकर निकलता तो यह शिक्षक हूटिंग करते। कहते आपको और हमको जिले में ही रहना है। अगर आज आप ने साथ नहीं दिया तो हम लोग भी साथ नहीं देंगे। इसी तरह के कई अन्य भी बातें करते रहे।
शिक्षक कार्यालय के मेन गेट पर ही धरना दे रहे थे। ऐसे में अगर कोई शिक्षक अंदर जाना चाहता था तो उसे अन्य शिक्षक रोक देते थे। ऐसे में कई शिक्षकों ने इस प्रदर्शन को दरकिनार करते हुए कार्यालय के पीछे से खिड़की से जाकर अपने प्रपत्र जमा किए। जब प्रदर्शनकारी शिक्षकों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने पीछे से जाने वाले शिक्षकों पर भी निगाह बनाए रखी।
सड़क के किनारे स्थित स्कूल बने पसंद
अंतरजनपदीय स्थानांतरण में जिले को आए अधिकांश शिक्षक लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं। एक शिक्षक ने बताया कि जब उन्होंने अंतरजनपदीय स्थानांतरण में विकल्प भरे थे तो लखनऊ, बाराबंकी व सीतापुर का विकल्प भरा था। सोचा था लखनऊ में रहकर रोजाना इन तीनों जिलो में आसानी से पहुंचा जा सकता है।
जब सीतापुर ट्रांसफर हुआ तो खुशी हुई। उम्मीद थी सिधौली, खैराबाद, कसमंडा व गोंदलामऊ विकासखंड के विद्यालय मिल जाएंगे। लेकिन काउंसिलिंग में इन विकासखंड के इक्का दुक्का ही विद्यालय खोले गए है। जिले से 1400 शिक्षक जाने से भारी संख्या में शिक्षकों की कमी हुई है। इसलिए सभी विद्यालय खोले जाए।