सीतापुर। बिसवां विकासखंड के सरैंया सानी गांव में सोमवार को किसानों की आय बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से एक विशेष कृषि प्रशिक्षण व जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के वैज्ञानिकों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। प्राकृतिक खेती की उपयोगी तकनीकों से परिचित कराया, जिससे फसलों की लागत घटाई जा सके।
गृह वैज्ञानिक डॉ. रीमा ने गृह वाटिका में संतुलित उर्वरक प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पोषक तत्वों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग सब्जियों की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। परिवार के पोषण स्तर को भी सुदृढ़ करता है। प्रशिक्षण सत्र में प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों एवं उसके व्यावहारिक पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया।
ग्राम प्रधान नेहा अवस्थी, कृषि विभाग से संजय अवस्थी (एटीएम), कृषि सखी गीता देवी सहित प्रगतिशील किसानों लाजवंती, कमला, पुष्पा, गोपी, सुनील कुमार एवं हेमनाथ ने सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही।
विशेषज्ञों ने इस बात पर भी बल दिया कि वर्तमान जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में जल संरक्षण, जैविक संसाधनों का समुचित उपयोग और स्थानीय कृषि प्रणालियों को सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है। किसानों को समूह आधारित खेती, फसल विविधीकरण एवं औषधीय फसलों के विस्तार के लिए प्रेरित किया गया, जिससे उनकी आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित हो सकें।