सीतापुर। ब्लॉक से लेकर सीएम तक जनता द्वारा शिकायतें की जा रही हैं। इनका निस्तारण गुणवत्तापूर्ण नहीं किया जाता है। मनमाने ढंग से निस्तारित कर दिया जाता है। आईजीआरएस प्रकरणों के निस्तारण की समीक्षा निरंतर एडीएम न्यायिक प्रभारी अफसर आईजीआरएस हरिशंकर लाल शुक्ल की ओर से की जा रही है। हर सप्ताह डीएम स्वयं डिफाल्टर अफसरों की समीक्षा करते हैं। 23 जनवरी को सभी कार्यालयाध्यक्ष सहित अन्य अफसरों को जन सुनवाई संदर्भों के निस्तारण के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।
इसके बावजूद अफसरों की कार्यशैली नहीं सुधर रही है। एक मार्च को एडीएम न्यायिक ने आईजीआरएस प्रार्थनापत्रों के निस्तारण की बारीकी से परीक्षण किया तो कई प्रकार की गड़बड़ियां मिली। तहसीलदार महोली ने आईजीआरएस पोर्टल पर एक शिकायत पर पाया कि पोर्टल पर भेजी गई रिपोर्ट में दफ्तर का नाम नहीं है। हस्तलिखित अपठनीय, नाम व पदनाम के बिना मोहर व पत्रांक रहित आख्या अपलोड की गई। संबंधित शिकायत को फिर जांच कर स्पष्ट रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश के बाद भी कार्यशैली नहीं सुधरी।
इस संबंध में तहसीलदार से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसी प्रकार एडीओ पंचायत पहला ने एक जन संदर्भ के निस्तारण में लापरवाही बरती। एडीओ पंचायत एलिया ने इसी तरह दो मामलों में मनमाने तरीके से संदर्भ निस्तारित किया। ईओ महोली ने एक शिकायत अधूरी गुणवत्ता रहित आख्या अपलोड की। पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरते जाने पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। इन सभी मामलों पर प्रभारी अफसर आईजीआरएस हरिशंकर लाल शुक्ल ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए चारों अफसरों से स्पष्टीकरण मांगा है। तीन दिन में इसका जवाब देना है, अन्यथा की स्थिति में संबंधित अफसर के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित कर दी जाएगी।