सीतापुर। लेखपाल संघ के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पर हड़ताल चल रही है। इससे शासकीय कार्य में व्यवधान हो रहा है। इसके मद्देनजर शासन-प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। इसी क्रम में प्रशासन ने 21 लेखपालों को निलंबित कर दिया है। इसके पूर्व 16 लेखपाल निलंबित किए जा चुके हैं। 406 लेखपालों को सर्विस ब्रेक का नोटिस दिया जा चुका है।
लेखपालों की हड़ताल से राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं। आय, जाति, निवास व हैसियत प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। खसरा भी नहीं बने रहे हैं। इसके लिए काश्तकार भटक रहे हैं। इससे बैंकों से ऋण मिलने में दिक्कत आ रही है।
दाखिल खारिज समेत अन्य कार्यों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इससे जिले की प्रगति पर भी असर पर रहा है। लेखपालों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए प्रशासन द्वारा सख्ती बरती जा रही है।
पूर्व में सभी सात तहसीलों के लेखपाल संघ के अध्यक्ष एवं मंत्री के साथ ही जिलाध्यक्ष व मंत्री को मिलाकर कुल 16 लेखपाल निलंबित किए गए थे। इसके अतिरिक्त 406 लेखपालों को सर्विस ब्रेक का नोटिस दिया गया था। फिर से प्रशासन ने लेखपाल संघ के अन्य पदाधिकारियों सहित 21 लेखपालों को निलंबित कर दिया है। इससे निलंबन का आंकड़ा 37 हो गया है।
एडीएम (वित्त एवं राजस्व) विनय कुमार पाठक ने बताया कि 41 लेखपाल काम पर वापस आ गए हैं। 37 लेखपालों को निलंबित किया गया है। 406 लेखपालों को सर्विस ब्रेक का नोटिस दिया गया है।
लेखपालों की हड़ताल से आय, जाति, हैसियत व निवास प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। आवेदन करने के बाद लोग प्रमाणपत्र के लिए जन सुविधा केंद्र एवं सहज केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। वर्तमान में निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी 177 हैसियत प्रमाणपत्र नहीं बन सके हैं।
इसी प्रकार 4091 निवास प्रमाणपत्र नहीं बने हैं। 836 जाति प्रमाणपत्र भी पेंडिंग में हैं। सर्वाधिक 4562 आय प्रमाणपत्र भी निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद नहीं बने हैं। इस तरह समयावधि के बाद नौ हजार 659 प्रमाणपत्र पेंडिंग में हैं।