परिषदीय परीक्षाएं माखौल बनकर रह गई हैं। पहले दिन सामूहिक नकल करके बच्चों ने परीक्षा दी। शिक्षकों ने भी पलीता लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने तो ब्लैकबोर्ड पर उत्तर लिखकर बच्चों को प्रश्न हल करवा दिए।
इसके साथ ही बच्चों ने किताब रखकर भी प्रश्नों के उत्तर सॉल्व किए। यह नजारा पिसावां, एलिया, रामपुर मथुरा, मछरेहटा, मिश्रिख सहित अन्य विकास खंड़ों के अधिकांश विद्यालयों में देखने को मिला।
मौखिक रुप से परीक्षा वैसे तो शनिवार को शुरू हो गई थी, लेकिन लिखित परीक्षाएं सोमवार से प्रारंभ हुई। पहले दिन हिन्दी व गणित का प्रश्नपत्र था। लेकिन इस परीक्षा को कराने में न तो शिक्षक न ही विभाग ने सख्ती दिखाई।
कामचलाऊ तरीके से किसी तरह परीक्षा करा दी। आलम यह रहा कि एक साथ एक ही क्लास के बच्चों ने बैठकर परीक्षा दी। न तो कक्ष निरीक्षक बनाए गए, न ही सीटिंग प्लान। जिस बच्चे का जहां पर मन आया, वहां पर बैठकर हल कर लिया। अगर कहीं पर किसी बच्चे को दिक्कत हुई तो गुरुजी ने भरपूर साथ देते हुए बोर्ड पर ही उत्तर लिख दिए।
हमारा परिवेश पुस्तक सेपूछे गए सवाल
सीतापुर। परिषदीय परीक्षा कराने सहित प्रश्नपत्र तैयार कराने में भी विभाग ने जमकर लापरवाही बरती। आलम यह रहा कि कक्षा तीन में हिन्दी के प्रश्नपत्र में सामाजिक विषय के हमारा परिवेश पुस्तक से प्रश्न पूछे गए थे। यह देखकर बच्चे दंग रह गए। बच्चों ने गुरुजी से इसकी शिकायत की। गुरुजी ने भी कमी मानते हुए वही प्रश्नपत्र हल करवा दिया।
गणित में निकले शारीरिक शिक्षा के प्रश्नपत्र
रामपुर मथुरा। रामपुर मथुरा के उच्च प्राथमिक विद्यालय जयरामपुर में कक्षा छह में गणित का पेपर था। जब शिक्षकों ने गणित का पैकेट खोला तो उसमें शारीरिक शिक्षा के प्रश्नपत्र निकले। इससे शिक्षक अचंभित रह गए। फिर उन्होंने शारीरिक शिक्षा का बंडल खोला तो उसमें गणित के पेपर निकले।
ब्लैकबोर्ड पर लिखे उत्तर
एलिया विकासखंड का प्राथमिक विद्यालय काजी कमालपुर। पहले दिन हिंदी का प्रश्नपत्र था। एक शिक्षक ब्लैकबोर्ड पर प्रश्नों के उत्तर लिखकर बच्चों को हल करवा रहे थे। उच्च प्राथमिक विद्यालय बेलवा में झुंड में बैठकर बच्चे एग्जाम दे रहे थे। यहां के बच्चों को खाना तक नहीं मिला। यहां पर 149 के सापेक्ष केवल 97 बच्चे मिले।
झुंड में बैठकर दी परीक्षा
रामपुर मथुरा विकासखंड का प्राथमिक विद्यालय बजेहरा यहां पर भी सामूहिक नकल होते मिली। 72 में केवल 20 बच्चे मिले। प्राथमिक विद्यालय मरौच में झुंड में बैठकर बच्चे परीक्षा दे रहे थे। प्राथमिक विद्यालय सिरकुंडा प्राचीन के हालात तो बहुत खराब मिले। ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर प्रधानाध्यापक बहुत कम आते हैं। परीक्षा में 51 के सापेक्ष केवल आठ बच्चे मिले। वह भी एक साथ बैठकर परीक्षा दे रहे थे।
एक-दूसरे की कॉपी देखकर हल किए प्रश्न
पिसावां का प्राथमिक विद्यालय नैकाखेड़ा यहां पर बच्चों को ब्लैकबोर्ड पर लिखकर उत्तर हल करवाए गए। कैमरा देखते ही शिक्षक उसको मिटाने में जुट गए। प्राथमिक विद्यालय देवरिया में 80 के सापेक्ष केवल 35 नौनिहाल मिले। यहां पर सामूहिक रूप से बच्चों ने उत्तर पुस्तिका पर प्रश्न हल किए। प्राथमिक विद्यालय पकरिया में भी बोर्ड पर उत्तर लिखे गए। उच्च प्राथमिक विद्यालय मूडाकलां में हिन्दी के प्रश्नपत्र के साथ कला की भी परीक्षा करा दी गई। जबकि कला का पेपर पहले हो चुका है।