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Sitapur News: 30 रुपये में बिक रहा 10 वाला स्टांप पेपर

Tue, 17 Dec 2024 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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सीतापुर। जिले में 10 रुपये के स्टांप पेपर की किल्लत है। इस वजह से उसकी कालाबाजारी शुरू हो गई है। स्टांप के लिए लोगों को दो से तीन गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। 10 रुपये का स्टांप पेपर 30 रुपये में बिक रहा है। इसके अलावा 50 और 100 रुपये वाले स्टांप की कीमत भी अधिक वसूली जा रही है।
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ई स्टांप व्यवस्था भी लोगों को राहत नहीं दे पा रही है। दरअसल, शपथपत्र बनवाना हो या अन्य कोई लिखा-पढ़ी करनी हो, हर कहीं स्टांप पेपर की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सदर से लेकर अन्य सभी तहसीलों में स्टांप पेपर की कमी बताकर 10 रुपये वाला स्टांप पेपर 20 से 30 रुपये में बेचा जा रहा है।

ई स्टांप भी दोगुने दाम पर बेचा जा रहा है। मजबूरन लोग अधिक दाम चुकाकर स्टांप खरीद रहे हैं। सीतापुर कचहरी के अधिवक्ता लाल बहादुर ने बताया कि अक्सर जरूरत पड़ने पर मैन्युअल स्टांप खरीदने पड़ते हैं जोकि महंगे मिलते हैं।
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सदर तहसील में वसूली जा रही तीन गुना कीमत
सिधौली के गुरुदीन अपने वाहन का ट्रांसफर कराने एआरटीओ दफ्तर आए थे। इस दौरान स्टांप की जरूरत पड़ी तो सीतापुर कचहरी पहुंचे। उन्होंने बताया कि 10 रुपये वाला स्टांप 30 रुपये का दिया गया। बताया कि यही रेट है, मजबूरन खरीदना पड़ा। सीतापुर के राजू शपथपत्र बनवाने के लिए स्टांप लेने कचहरी पहुंचे। उन्होंने बताया कि स्टांप विक्रेता ने 10 वाला स्टांप 30 रुपये में दिया।



मिश्रिख में दोगुनी कीमत पर बिक रहे स्टांप
मिश्रिख तहसील में दिव्यांश बाजपेयी स्टांप लेने पहुंचे। उन्हाेंने बताया कि शपथपत्र बनवाने के लिए स्टांप की जरूरत थी। दिव्यांश के मुताबिक 10 वाला स्टांप 20 रुपये का दिया गया। पूछने पर कहा कि 30 रुपये का ही बिकता है फिर भी 20 रुपये का दिया है। सत्यपाल ने बताया सुलह-समझौते के एक मामले में स्टांप की जरूरत थी। स्टांप विक्रेता के पास लेने गए तो 10 का स्टांप 20 रुपये का दिया। जब मैंने अधिक कीमत को लेकर टोका तो कहा कि यही रेट है।



महमूदाबाद में तीन माह से नहीं हैं मैन्युअल स्टांप
महमूदाबाद तहसील में मैन्युअल स्टांप पेपर पिछले तीन माह से उपलब्ध नहीं हैं। ई स्टांप निकालकर विक्रेता देते हैं। 10 वाला स्टांप 20 जबकि 100 वाला 120 का बेचा जा रहा है। सत्यम निवासी सेमरी ने बताया कि सौ रुपये का स्टांप लेने आये थे जो 120 का मिला। स्टांप विक्रेताओं का कहना है कि ऑनलाइन निकालने में तमाम स्टांप खराब हो जाते हैं और हमारे पैसे कट जाते हैं, इसलिए महंगे देते हैं।



कोषागार से भी चलती है कालाबाजारी
सदर तहसील से जुड़े कई स्टांप विक्रेताओं ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोषागार से ही स्टांप महंगे मिलते हैं। स्टांप पेपर की कमी बताते हुए अधिक कीमत वसूली जाती है। ऐसे में अधिक दाम पर स्टांप बेचना हमारी मजबूरी है।
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