नैमिषारण्य। पितृपक्ष के अवसर पर प्रसिद्ध कालीपीठ संस्थान में भागवत महाकुंभ का शुभारंभ सोमवार को कलश यात्रा के साथ हुआ। कालीपीठाधीश्वर गोपाल शास्त्री के संयोजन व सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के पहले दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कालीपीठ चौक से शुरू हुई इस यात्रा में काफी संख्या में श्रद्धालु वेदपाठी छात्र शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्य प्रवाचक ने कहा कि भागवत कथा केवल कान से सुनने का विषय नहीं है, बल्कि यह जीवन में वैराग्य और भक्ति को जगाने वाला परम पावन ग्रंथ है, जो मनुष्य को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाता है।
बैंड-बाजे और जयकारों के साथ निकली यह कलश यात्रा मां ललिता देवी मंदिर, चक्रतीर्थ सहित पूरे नगर का भ्रमण करते हुए वापस कालीपीठ कथा पंडाल में पहुंचकर संपन्न हुई। यात्रा में कालीपीठाधीश्वर गोपाल शास्त्री के साथ मुख्य कथा व्यास धनश्री लेले, कथा व्यास चारुदत्त हाफले और महंत भास्कर शास्त्री भी विशेष रूप से मौजूद रहे। पंडाल में पहुंचने के बाद पूज्य संतों की उपस्थिति में श्रीमद्भागवत पोथी का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया।
प्रथम दिवस की कथा में मुख्य कथाव्यास धनश्री लेले ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भागवत साक्षात श्रीकृष्ण का शब्दमयी स्वरूप है। कथा के पहले दिन श्रीमद्भागवत के महत्व को समझाते हुए उन्होंने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के कष्ट निवारण की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब कलयुग के प्रभाव से ज्ञान और वैराग्य वृद्ध व मूर्छित हो गए, तब देवर्षि नारद के प्रयास और सनकादिक ऋषियों द्वारा किए गए श्रीमद्भागवत के शुकदेव-संवाद के पारायण से दोनों पुनः युवा और जाग्रत हो उठे।
इस अवसर पर कालीपीठाधीश्वर गोपाल शास्त्री ने पितृपक्ष में कथा श्रवण के महत्व के बारे में भी विस्तार से बताते हुए कहा कि पितृपक्ष के दौरान भागवत कथा सुनना अत्यंत फलदायी और विशेष महत्व रखता है। आप सभी परम सौभाग्यशाली हैं जिन्हें नाभि गया क्षेत्र नैमिषारण्य की इस पवित्र धरा पर पितृपक्ष में श्रीमद्भागवत कथा और रामकथा सुनने का यह अवसर मिला है। इस अवसर पर अंजनी शर्मा, अशोक दीक्षित, सूरज शर्मा आदि मौजूद रहे।