बच्चे एक पौधशाला है। पौधशाला में जैसी पौध तैयार होगी, भविष्य में उसमें वैसे ही फल लगेंगे। यह बात निरंकारी बाल समागम में बलविंदर कौर ने कही। उन्होंने बताया कि परिवार में माता-पिता तांगे के दो पहिए हैं। बच्चे तांगे पर बैठे हुए सवारी कर रहे हैं। अगर पहिया गड़बड़ हो गया तो सवारी अपने गंतव्य तक पहुंच नहीं पाएगी।
वहीं बच्चों को सजने संवारने में माता-पिता की अहम भूमिका होती है। उचित मार्गदर्शन के लिए सद्गुरू की आवश्यकता होती है। सद्गुरू ही हमें मूल आत्मा परमात्मा की पहचान करा देता है। तब हमें पता चलता है कि यह इंसानी जामा है, जो 84 लाख योनियों में परमात्मा की अहेतुक कृपा से मिला है।
मानव जीवन पाने के बाद प्रथम कर्तव्य यही है कि मनुष्य अपने निज स्वरूप का बोध सद्गुरू की शरण में जाकर प्राप्त कर लें। यदि ऐसा नहीं किया तो मानव योनि व अन्य योनियों में कोई अंतर नहीं रहेगा। उन्होंने कहा आज सद्गुरू की गद्दी पर बाबा हरदेव सिंह महराज विराजमान हैं।
जो क्षण मात्र में जड़ चेतन की ग्रंथि का भेदन कर जीव को परमात्मा से मिला देते हैं। आयोजन निरंकारी मिशन के बाल संगत व कमेटी द्वारा किया गया है। जिसमें लखीमपुर व शाहजहांपुर के बच्चों ने भाग लिया।