घाघरा का जलस्तर बढ़ने से तटीय क्षेत्र में बसने वाली आबादी में हलचल तेज हो गई है। लोग बाढ़ व कटान की संभावना को लेकर भयभीत हैं। घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि के साथ ही रामपुर मथुरा इलाके में कटान भी तेजी से हो रही है।
पिछले दो दिन में यहां के दो गांवों में 31 बीघा कृषि भूमि घाघरा में समा चुकी है। बुधवार को घाघरा ने 25 बीघा खेती निगल ली थी। जबकि गुरुवार रात को करीब छह बीघा और कृषि भूमि नदी में समा गई।
घाघरा व शारदा बैराज से छोड़े जा रहे पानी से जिले के गांजरी क्षेत्र में गुजरने वाली शारदा व घाघरा नदी के जलस्तर में इजाफा हो रहा है। हालांकि अभी इतना पानी नदियों में नहीं आया है, जो बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दे, लेकिन घाघरा नदी के कटान ने लोगों की धड़कनें तेज कर दी हैं।
इन दिनों घाघरा नदी रामपुर मथुरा क्षेत्र के अंगरौरा व दुबे पुरवा के निकट कटान कर रही है। यहां नरेश सिंह प दीपक तिवारी के खेत कटान की भेंट चढ़ रहे हैं। बीते चौबीस घंटों में दोनों किसानों की करीब छह बीघा खेती कटान की भेंट चढ़ चुकी है। वहीं नदी इस इलाके में करीब 2 मीटर से अधिक तटीय भूमि का कटान कर चुकी है।
नदी के पानी में करीब डेढ़ फीट तक इजाफा देखा जा रहा है। तटीय क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिस तरह से नदी कटान कर रही है, उसे देख कर लग रहा है कि आने वाले दिनों में तटीय इलाकों में नदी बड़ी तबाही मचाएगी।
उधर रेउसा क्षेत्र में निर्मल पुरवा,गोड़ियन पुरवा, जैतहिया, नगीनापुरवा, सिसैया बाजार आदि गांवों के लोग नदी के बढ़ते पानी को आने वाली बाढ़ की आहट बता रहे हैं। इन गांवों में बसने वाले ग्रामीणों ने सुरक्षित ठिकानों की तलाश अभी से ही शुरू कर दी है। ताकि स्थिति बिगड़ने पर वे परिवार के साथ सुरक्षित ठिकानों पर पलायन कर सकें।
तटीय क्षेत्र में सब्जी व मेंथा की फसलों को नुकसान
घाघरा नदी के तटीय इलाकों में किसानों ने खेतों में मेंथा व सब्जियों की फसल प्रमुख रूप से बो रखी है। इसलिए इन क्षेत्रों में परवर, लौकी, कददू, मिर्च आदि फसलों का बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है। मेंथा में नदी का पानी भरने से फसल बर्बाद हो रही है। जबकि कटान के चलते सब्जियों की फसलें तबाह हो रही हैं।
बारिश बढ़ा रही धड़कनें
रेउसा के गांजरी इलाके में बसने वाले ग्रामीणों की धड़कने बारिश बढ़ा रही है। तटीय क्षेत्र के पचीसा, निर्मलपुरवा, सिसैया बाजार,गोड़ियन पुरवा,जैतहिया, नगीना पुरवा, कबड़ियन पुरवा आदि गांवों में बसने वाले ग्रामीण आसमान में काली घटा देख कर घबरा रहे हैं। आसमान से बारिश होते ही वे चिंतित हो जाते हैं, कि न जाने कितना पानी बरसे और यहां के हालात बिगड़ जाए।