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शास्त्रीनगर मोहल्ला व क्लीनिक सील, घर-घर सर्वे के लिए बनीं टीमें

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शास्त्रीनगर : कोरोना मरीज की मौत के बाद मोहल्ले निरीक्षण करते डीएम । - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में भी अफसरों की लापरवाही सामने आई है। शहर के शास्त्रीनगर में रहने वाले कोरोना पॉजिटिव मिले प्रधान पति की मौत के बाद अफसरों की नींद खुली। डीएम के मौके पर पहुंचने और एसीएमओ को कड़ी फटकार लगाने के बाद जिम्मेदार हरकत में आए। आननफानन में मोहल्ला और निजी क्लीनिक को सील कर घर-घर सर्वे के लिए टीमें गठित कर दी गईं। डीएम अखिलेश तिवारी, सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा कोरोना पीड़ित मृतक के गांव घाघपुर भी पहुंचे।
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डीएम ने एसडीएम मिश्रिख को प्रधान पति के संपर्क में आए सभी लोगों की कांटेक्ट हिस्ट्री निकालने व संदिग्धों को क्वारंटीन करने का आदेश दिया। मछरेहटा ब्लॉक के घाघपुर निवासी प्रधान पति मिश्रिख ब्लॉक के अमजदपुर में शिक्षक भी थे। कई दिनों से उन्हें बुखार आ रहा था। लोहारबाग स्थित महावर क्लीनिक में उन्होंने खुद को दिखाया था। डॉक्टर ने दवा दी थी। वह दवा लेकर शहर के शास्त्रीनगर मोहल्ला स्थित घर चले गए थे, लेकिन इलाज में फायदा नहीं होने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से उनकी हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने केजीएमयू रेफर किया था।
केजीएमयू में कोरोना की जांच में वह चार जून को पॉजिटिव मिले थे। केजीएमयू में ही इलाज चल रहा था, लेकिन पांच जून की रात उनकी कोरोना से मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही जिले में हड़कंप मच गया। इस मामले में अलग-अलग विभागों के जिम्मेदारों की लापरवाही भी सामने आ गई। हैरानी की बात है कि चार जून को दोपहर में प्रधान पति के कोरोना संक्रमित मिलने के बाद भी कोरोना प्रोटोकाल का पालन नहीं हुआ। घाघपुर गांव को तो सील कर स्वास्थ्य टीमों ने सर्वे किया, लेकिन शास्त्रीनगर स्थित उनके घर से लेकर 250 मीटर का इलाका सील नहीं किया गया।
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हॉटस्पॉट की भी कार्रवाई नहीं हुई। मोहल्ले में उनके संपर्क में आने वालों को चिह्नित करने के लिए भी घर-घर सर्वे तक नहीं किया गया। प्रधान पति की मौत के बाद सोमवार को डीएम अखिलेश तिवारी, एसडीएम अमित भट्ट, ईओ नगर पालिका के साथ शास्त्रीनगर मोहल्ला पहुंचे। डीएम ने वहां मौजूद एसीएमओ डॉ. उदय प्रताप सिंह को जमकर फटकार लगाई। कहा कि इतने घंटे और दो दिन गुजरने के बाद भी सर्वे नहीं कराया गया। कोरोना मामले में इतनी बड़ी लापरवाही क्यों की गई।
डीएम के सवालों का एसीएमओ जवाब नहीं दे सके। डीएम की फटाकर के बाद जिम्मेदार हरकत में आए और आननफानन टीमें गठित कर घर-घर सर्वे का काम शुरू हो गया। मरीज के घर से 250 मीटर के दायरे को सील भी कर दिया गया है। कोरोना पीड़ित मृतक प्रधान पति ने लोहारबाग स्थित जिस क्लीनिक पर जाकर दवा ली थी, डिप्टी सीएमओ डॉ. राजशेखर ने उसे सील कर दिया।
250 मीटर का दायरा सील, आवाजाही पर रोक
इंस्पेक्टर शहर कोतवाली पीपी सिंह ने बताया कि मृतक के घर से 250 मीटर का दायरा सील किया गया है। तीन गलियों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। आवाजाही रोक दी गई है। इस परिधि में कोई भी आ-जा नहीं सकेगा। निगरानी के लिए प्वाइंटों पर पुलिस तैनात कर दी गई है। किसी को भी घर से निकलने की इजाजत नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने पर कोरोना प्रोटोकाल के तहत कड़ी कार्रवाई होगी।
क्लीनिक पर नहीं हो रहा था कोरोना प्रोटोकाल का पालन
डिप्टी सीएमओ/नोडल अधिकारी डॉ. राजशेखर ने बताया कि डीएम के आदेश पर क्लीनिक, अस्पताल को सील किया गया है। संचालक ने कोविड-19 के प्रोटोकाल का पालन करते हुए क्लीनिक चलाने का प्रपत्र सौंपा था, लेकिन इसके बाद भी निरीक्षण के दौरान मौके पर काफी भीड़ लगी मिली। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा था। मास्क के नियमों का उल्लंघन हो रहा था। इसको लेकर कार्रवाई हुई है।
सील के दायरे में 1606 आबादी, हो रही स्क्रीनिंग
एसीएमओ/सदर क्षेत्र के नोडल अधिकारी डॉ. उदय प्रताप सिंह ने बताया कि शास्त्रीनगर में कोरोना पीड़ित मरीज के मिलने के अगले ही दिन रविवार से चार टीमें सर्वे के लिए लगा दी गई थी। दो सुपरवाइजर भी लगे थे। सैनिटाइजेशन इनडोर और आउटडोर होता था। इनडोर का होना रह गया था, इसी को लेकर डीएम नाराजगी जता रहे थे। बताया कि सील हुए 250 मीटर के दायरे में 349 घर हैं, जिसकी आबादी 1606 है। सभी घरों का सर्वे कराकर लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। संदिग्ध मिलने पर क्वारंटीन किया जाएगा।
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