सीतापुर। दो साल पहले एक ग्राम पंचायत अधिकारी ने पंचायत के खाते से दो लाख रुपये निकाले पर काम नहीं कराया। एडीओ पंचायत ने धनराशि गबन की सूचना डीपीआरओ को दी थी। बावजूद इसके न तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई की गई, न ही धनराशि की वसूली हुई। सीडीओ ने कई बार कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उसका भी पालन नहीं किया गया। इस मामले को अमर उजाला ने दस जनवरी के अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया था। इसके बाद संबंधित सचिव को गबन का दोषी पाए जाने पर डीपीआरओ ने निलंबित कर दिया है।
प्रकरण विकासखंड रेउसा की ग्राम पंचायत थानगांव का है। यहां के खाते से दो लाख रुपये निकालने के बाद भी कार्य नहीं कराया गया। सहायक विकास अधिकारी पंचायत रेउसा द्वारा 22 अक्टूबर 2018 को थानगांव में दो लाख गबन होने की सूचना जिला पंचायत राज अधिकारी को दी गई। इस मामले में बीते साल दो नवंबर एवं 14 दिसम्बर को डीपीआरओ से सीडीओ ने रिपोर्ट तलब की। बावजूद इसके कार्रवाई नहीं की गई।
इसे गंभीरता से लेते हुए सीडीओ ने एक बार फिर सात जनवरी को डीपीआरओ को कड़ा पत्र भेजा था। कहा था, दो माह बीत जाने के बाद भी शासकीय धनराशि के गबन जैसे संवेदनशील प्रकरण में कार्रवाई कर अनुपालन से अवगत नहीं कराया गया है। शासकीय धनराशि के गबन जैसे प्रकरणों में दो साल तक कार्रवाई न होना, अफसरों की अप्रत्यक्ष संलिप्तता माना जाएगा।
इस खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से 10 जनवरी के अंक में ‘दो लाख खाते से निकाल लिए, नहीं कराया काम’ शीर्षक से प्रकाशित की थी। इसके बाद ग्राम पंचायत अधिकारी अजीत कुमार यादव को जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार ने निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश के अनुसार सचिव द्वारा मनमाने रूप से धनराशि आहरण करने के बाद ग्राम पंचायत थानगांव में कोई कार्य न कराकर दो लाख गबन किए जाने के लिए पूर्ण रूप से दोषी पाए गए हैं।