सीतापुर। करीब दो साल पहले कोरोना के कहर से हर तरफ त्राहि-त्राहि मची थी। अधिकतर लोगों का रोजगार छिना गया। नौकरी चली गई फिर भी अभिभावकों ने अपने बच्चों के भविष्य की खातिर किसी तरह फीस जमा की। अब इन अभिभावकों को कोर्ट ने राहत भरी खबर दी है। 15 फीसद फीस बच्चों को लौटाने का निर्देश दिया है तो इससे जिले के करीब ढाई लाख नौनिहालों को फायदा होगा। उनसे वसूली गई फीस विद्यालयों को वापस करनी होगी। न्यायालय के निर्देश के बाद अब शिक्षा विभाग सरकार की तरफ से आदेश आने का इंतजार कर रहा है।
दो साल पहले कोरोना ने दस्तक दी थी। दूसरी लहर तो इतनी खतरनाक थी कि ऑक्सीजन की कमी के चलते लोगों की सांसे थम रही थी। इस अवधि में घर से निकलना बहुत ही खतरनाक था। हर तरफ कोरोना का ही कहर फैला हुआ था। इससे स्कूल कॉलेज अनिश्चिकालीन के लिए बंद कर दिए गए थे। ऐसे में नौनिहाल अपने घर ही पढ़ाई कर रहे थे। ऑनलाइन शिक्षा एक विकल्प बनकर उभरी थी। इस अवधि में स्कूलों ने पूरी फीस वसूली ली थी।
इस पर तमाम अभिभावक सरकार से बराबर फीस माफ करने व वसूली गई फीस को वापस करने की मांग कर रहे थे। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। जिसमें कहा है कि शैक्षिक सत्र 2020-21 में निजी विद्यालयों की तरफ से वसूली गई फीस का 15 फीसद हिस्सा अभिभावकों को वापस करना होगा। अगर नौनिहाल विद्यालय में पढ़ रहे है तो यह बढ़ोत्तरी उनकी अगली फीस में समायोजित कर दी जाए।
अगर वह विद्यालय छोड़ चुके है तो उन्हें वापस कर दी जाए। इसका फायदा जिले के करीब ढाई लाख नौनिहालों को होगा। इससे करीब एक हजार विद्यालयों को यह फीस उन्हें हरहाल में वापस करनी होगी। हालांकि विद्यालय इस पर कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। वहीं शिक्षा विभाग शासन के तरफ से आदेश आने का इंतजार कर रहा है।
निर्देश आने पर होगा पालन
हाईकोर्ट के निर्णय को देखा है लेकिन शासन की तरफ से अभी कोई निर्देश नहीं आया है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उसकी कॉपी आने में थोड़ा समय लग जाता है। जैसे ही निर्देश मिलेेगे उसका पालन कराया जाएगा।
- अजीत कुमार, बीएसए