रेउसा/रामपुर मथुरा। सरयू का जलस्तर 24 घंटे में 90 सेमी. बढ़ने से नदी एक बार फिर बेकाबू हो गई। जलस्तर 119.20 मीटर यानी लाल निशान के पार पहुंचा तो तराई क्षेत्र के करीब 50 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। लगभग 600 से अधिक घरों में पानी भरने से लोग पलायन को मजबूर हैं। कई गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी के तेज बहाव से आवागमन ठप है। हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है।
गांजर की लगभग 80 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ता जा रहा है। इससे खतरा और बढ़ने की आशंका है। बैराजों से शनिवार को भी करीब साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले एक-दो दिनों में बाढ़ और विकराल होने की आशंका है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बाढ़ ग्रस्त इलाके में पहुंचकर स्थिति को देखा और पीड़ितों को हरसंभव मदद पहुंचाने का आश्वासन दिया है। लंच पैकेट वितरित कराए जा रहे हैं।
ब्लॉक रेउसा क्षेत्र में सरयू की बेकाबू लहरें तबाही मचाने को बेताब हैं। पिछले दो दिनों से जलस्तर में इजाफा होता जा रहा है। प्रशासनिक अमले के जिम्मेदार हालात सामान्य होने का राग अलापते रहे। नतीजतन, शनिवार को खतरे के निशान को पार कर गए सरयू के पानी ने तटवर्ती इलाके में तबाही मचानी शुरू कर दी।
परमेश्वर पुरवा, दुर्गा पुरवा, लोधनपुरवा, जैतहिया, मरेली, ठेकेदार पुरवा, पासिन पुरवा, दर्जिन रेती, गार्गीपुरवा, म्योड़ी छोलहा, नई बस्ती चहलारी, आजाद नगर, नगीनापुरवा, ताहपुर बजहा, गौढ़ी, श्रीरामपुरवा आदि करीब 20 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। पासिनपुर पुरवा संपर्क मार्ग कट जाने व आजादनगर, दुर्गापुुरवा आदि मार्गों पर पानी भरने से आवागमन जोखिम भरा हो गया है। आजाद नगर के कई परिवार घरों में पानी भरने से बजहा संपर्क मार्ग के किनारे शरण ले रहे हैं।
अचानक आने वाली बाढ़ से जो पलायन नहीं कर पाए उनकी जिंदगी तख्त व चारपाई पर सिमट गई है। आजाद नगर में नरेन्द्र के घर दो से तीन फीट तक पानी भर जाने से गृहस्थी तख्त पर सिमटी दिखाई दी। पत्नी चमेली तख्त पर ही खाना बना रही थी। यहां के प्यारेलाल गौतम, राम भूखन, वीीश, राम नरेश आदि ने बताया कि नाव के अभाव में लोग जोखिम उठाकर पैदल ही पानी के बीच सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
बाढ़ का पानी तेजी से अन्य निकटवर्ती गांवों की तरफ बढ़ रहा है। पूरे इलाके में एक हजार बीघे से अधिक की खेती बाढ़ की चपेट में आ गई है। खेत से लेकर गांवों तक बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है। नदी का विकराल रूप देखकर तटीय क्षेत्र में एक बार फिर से हड़कंप मच गया है।
ब्लॉक रामपुर मथुरा क्षेत्र में अटौरा के फतेपुरवा गांव के पास लगे मीटर गेज पर शनिवार को सरयू का जलस्तर 119.20 मीटर दर्ज किया गया। पानी खतरे के निशान से 20 सेमी. ऊपर बहने के चलते तटवर्ती फतेपुरवा, दुबे पुरवा, मिश्रनपुरवा, जगरूप पुरवा, रानीगंज, अखरी, निरंजन पुरवा, कनरखी, अंगरौरा, सोतीपुरवा, बंगालीपुरवा, हरिपुरवाए, हरिहरपुरवा, कनरखी घाट, बाबाकुटी, शंकर पुरवाए समेत करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए है।
अंगरौरा, बक्सीपुरवा, दुबे पुरवा, शंकर पुरवा व अखरी गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया है। इन रास्तों पर करीब चार फीट तक पानी बह रहा है। तेज बहाव से आवागमन प्रभावित होत गया है। सोती पुरवा, बाबाकुटी, शंकर पुरवा, प्यारे पुरवा में लोगों के घरों में बाढ़ का पानी करीब चार फीट भरने से हड़कंप मच गया।
27 नावें लगाई गईं
बिसवां तहसीलदार अविचल प्रताप सिंह ने बताया कि पासिनपुरवा, लोधपुरवा व गार्गीपुरवा में 1200 लंच पैकेट वितरित कराए गए हैं। म्योड़ी छोलहा व काशीपुर में ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर उन्हें अलर्ट किया गया है। नाव की व्यवस्था कराई जा रही है। महमूदाबद तहसीलदार मनीष कुमार ने बताया कि एसडीएम के साथ मौके का जायजा लिया है। प्रभावित इलाके में 27 नावें लगाई गई हैं। स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग की टीमें भी निगरानी कर रही हैं। दवाओं व भूसा का वितरण करवाया जा रहा है।
तो और बिगड़ेंगे हालात
बैराजों से जिस हिसाब से पानी छोड़ा जा रहा है, उससे हालात में सुधार के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पहाड़ों पर हो रही बारिश से मैदानी इलाकों में हालात बिगड़ रहे हैं। बैराजों पर जलस्तर बढ़ रहा है। वहां से नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। इससे बाढ़ के पानी में इजाफा हो रहा है।
कंट्रोल रूम पर दें सूचना
जिला मुख्यालय पर बाढ़ आपदा राहत के लिए पहले से ही कंट्रोल रूम संचालित है। इसका दूरभाष नंबर 05862-242400, 05862-240009 व 05862-245753 है। इस पर बाढ़ आपदा बचाव से संबंधित कोई भी सूचना दी जा सकती है।
सरयू का जलस्तर बढ़ने से किनारे के कुछ गांवों में पानी भर गया है। खतरे वाली कोई बात नहीं है। ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा गया है। पीएसी और तहसील प्रशासन लगातार हालातों पर नजर बनाए हुए है।
- राम भरत तिवारी, एडीएम