सीतापुर। सरकारी धनराशि के गबन में फंसे ग्राम पंचायत अधिकारी अभयचंद्र मौर्य के करीबियों के नाम से संचालित छह फर्मों को किसी भी तरह के भुगतान पर जिलाधिकारी अनुज सिंह ने रोक लगा दी है। उन्होंने इस मामले की जांच सीडीओ की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी को सौंपी है। साथ ही निर्देश दिया है कि इसमें दोषी अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ आरोपित फर्मों का नाम भी काली सूची में दर्ज किया जाए।
ब्लॉक रामपुर मथुरा की 20 ग्राम पंचायतों में ओडीएफ योजना में 70 लाख रुपया के भ्रष्टाचार का मामला सेवता विधायक ज्ञान तिवारी ने उठाते हुए शिकायत की थी। इस मामले की जांच में रामपुर मथुरा के ग्राम पंचायत अधिकारी व प्रभारी एडीओ पंचायत अभयचंद्र मौर्य वित्तीय अनियमितता के मामले में मुख्य आरोपी हैं।
सेवता विधायक ने शुक्रवार को डीएम से मिलकर सचिव अभयचंद्र मौर्या पर अपने करीबियों के नाम बनाई गई फर्मों के माध्यम से वित्तीय अनियमितता करने का आरोप भी लगाया। विधायक ने फर्म के नाम व भुगतान का ब्यौरा भी डीएम को सौंपा था। डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच सीडीओ अक्षत वर्मा की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी को सौंपी है। जांच कमेटी में सीडीओ के साथ ही डीडीओ हरिश्चंद्र प्रजापति एवं वरिष्ठ कोषाधिकारी जान्हवी मोहन भी शामिल हैं।
इस बीच डीएम ने जांच पूरी होने तक आरोपी फर्मों अरुणिमा ट्रेडिंग कंपनी, मौर्या ट्रेडर्स कंपनी, कृष्णा ट्रेडिंग कंपनी, मुंशी शिवपूजन, मुंशी उमाशंकर तथा मुंशी विनय कुमार की फर्म के साथ किसी भी तरह के लेनदेन व भुगतान पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश सभी विकास खंड अधिकारियों को दिया है।