रामपुर मथुरा/सीतापुर। सरयू नदी खतरे के निशान को पार कर गई है। रविवार को नदी का जलस्तर 20 सेमी. के इजाफे के साथ 119.20 मीटर पर पहुंच गया। सरयू में उफान से तटवर्ती 30 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। चार गांवों के अंदर पानी घुस गया है। इससे हालात बिगड़ गए हैं। संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ गईं हैं। उधर, बैराजों से रविवार को नदियों में तीन लाख 63 हजार 131 क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है।
सरयू का जलस्तर शनिवार रात अचानक बढ़ गया। फत्तेपुरवा में लगे मीटर गेज पर जलस्तर 119.20 मीटर दर्ज किया गया। शनिवार की तुलना में 20 सेमी. पानी बढ़ा है। इसकी वजह से नदी के पास व तलहटी के गांवों में पानी पहुंच गया है।
तटवर्ती अखरी, अंगरौरा, शंकरपुरवा, बाबाकुटी, फत्तेपुरवा, नया पुरवा, निरंजन पुरवा, प्यारे पुरवा, कोठार, बैजू पुरवा, बंगाली पुरवा, मिश्रण पुरवा, बक्सी पुरवा, सोती पुरवा, कनरखी, खुन्ना पुरवा समेत 30 गांवों की लगभग 20 हजार आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। अखरी तथा अंगरौरा समेत चार गांवों के घरों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है। तख्त या मचान पर चूल्हा रखकर बाढ़ पीड़ित जीवन यापन कर रहे हैं।
सोतीपुरवा, बलेसरपुरवा, अर्जुन पुरवा, धांधी रेती, निरंजन पुरवा, बाबाकुटी, शंकर पुरवा, प्यारे पुरवा तथा अंगरौरा के संपर्क मार्ग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पीड़ितों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बुधनी ने बताया कि ज्यादातर हैंडपंप बाढ़ में डूबने से पेयजल का संकट बना हुआ है। पुत्तीलाल ने बताया कि खेत से मैदानों तक बाढ़ का पानी भरा है। जानवरों के चारे का संकट है। प्रशासन भी चारे की व्यवस्था नहीं करा रहा है।
किस बैराज से छोड़ा गया कितना पानी
घाघरा बैराज- 1,55,130 क्यूसेक
शारदा बैराज- 1,38,707 क्यूसेक
बनबसा बैराज- 69,294 क्यूसेक
लंच पैकेट बांटे जा रहे
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लेखपालों की तैनाती कर नावों की व्यवस्था पहले से ही कर दी गई थी। बाढ़ चौकी पर भी तहसील के कर्मचारी व अधिकारी तैनात हैं। जिनके घरों में जलभराव की स्थिति है, उन्हें तटबंध पर ठहराया गया है। लंच पैकेट तथा बिस्कुट आदि का वितरण भी करवाया जा रहा है।
- सुखवीर सिंह, तहसीलदार महमूदाबाद
बारिश से कटान रोधी काम ठप
तंबौर/सीतापुर। शारदा नदी के किनारे कोल्हुआ पुरवा व देवपालपुर के पास रविवार को बरसात होने के कारण बांस की बाड़ व बोरियों में मिट्टी भरकर लगाने का काम बंद रहा। प्रधान प्रतिनिधि बालकृष्ण मौर्य ने बताया कि पानी रुकने के बाद अगर कटान रोकने के प्रयास फिर से शुरू नहीं हुए तो गांवों पर मंडरा रहे खतरे से छुटकारा नहीं मिलेगा। वहीं, रविवार को धीमी गति से नदी की धारा खेतों का कटान करती रही। इंद्रेश, पुत्तीलाल व शिवगोविंद का लगभग तीन बीघा खेत कटकर नदी में समा गया।
बुखार का बढ़ रहा प्रकोप
रेउसा इलाके में सरयू के किनारे बसे लगभग 25 गांवों के पास पानी पहुंच गया है। मरेली, पासिन पुरवा, संबारी पुरवा, संत राम पुरवा, गार्गी पुरवा, जंगल टपरी, ठेकेदार पुरवा, नगीना पुरवा, श्याम नगर, दर्जिन रेती आदि गांव पानी से घिरे हैं। अभी पानी गांवों के अंदर नहीं पहुंचा है। लेकिन आसपास पानी भरा होने से संक्रामक रोग पनपने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों की मानें तो किसी गांव में दवा का छिड़काव नही किया गया। स्वास्थ्य टीमें भी नहीं पहुंची हैं। बुखार व मच्छरों के प्रकोप से लोग परेशान हैं।