जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों में कैश की किल्लत दूर नहीं हो रही है। गुरुवार को भी यहां कैश का संकट बना रहा। खासकर गांजर का इलाका ज्यादा प्रभावित हो रहा है। तंबौर क्षेत्र की स्टेट बैंक में कैश नहीं बांटा गया। कुछ ऐसा ही हाल रेउसा के राजापुर व सेवता स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक का रहा। जहां पर ग्रामीण पहुंचे जरूर, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया गया। कुल मिलाकर ग्रामीण क्षेत्र के लोग कैश के संकट से जूझते नजर आए।
तंबौर प्रतिनिधि के अनुसार, सुबह होते ही क्षेत्र के तमाम ग्रामीण बैंकों की तरफ चल दिए। सुबह 10 बजे के बाद बैंक खुले तो लोग कतार लगाकर खड़े हो गए। दोपहर के वक्त बिसवां खुर्द स्थित स्टेट बैंक में कर्मियों ने लाइन में लगे लोगों को बताया कि बैंक में कैश आया ही नहीं है। इस वजह से भुगतान नहीं किया जा सकता है। जिसके बाद ग्रामीणों को मायूसी ही हाथ लगी। क्षेत्र की अन्य बैंकों में अधिकतम 2 हजार रुपये तक ही भुगतान किया गया।
मारू बेहड़ प्रतिनिधि के अनुसार, कुछ ऐसी ही हालत राजापुर स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की रही। यहां पर लोग लाइन में लगे जरूर, लेकिन दोपहर में बताया गया कि बैंक में कैश मौजूद न होने के कारण भुगतान नहीं किया जा सकता है। वहीं बैंक पहुंचे खाता धारकों का कहना है कि बीते एक सप्ताह से यहां कैश नहीं बांटा गया है। सेवता कस्बा स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की हालत भी कुछ जुदा नहीं थी।
वहां भी लोग सुबह से ही लाइन में लगे रहे, दोपहर में बताया गया कि कैश नहीं है। हालांकि देर शाम तक लोग इस उम्मीद के साथ बैंक के सामने बैठे रहे, कि शायद अब कैश आ जाए। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि बीते एक सप्ताह से इस बैंक में भी कैश का संकट है। कुछ इसी तरह सा हाल लहरपुर, बिसवां, महमूदाबाद, सिधौली, मिश्रिख, महोली आदि क्षेत्र की बैंकों का भी रहा। जहां अधिकांश बैंकों में कैश का वितरण नहीं किया जा सका।
लोगों को मायूस होकर घर वापस जाना पड़ा। हालांकि जिला मुख्यालय पर बैंकों में ग्रामीण क्षेत्र की अपेक्षा काफी सुधार देखने को मिला। यहां पर बैंकों से 24 हजार रुपये तक भुगतान किया जाता रहा। एटीएम की बात करें तो जिला मुख्यालय पर ही सिर्फ पांच स्थानों पर एटीएम चलते नजर आए। जबकि जिले के 97 एटीएम पूरी तरह से शोपीस बने रहे।