बैराजों से छोड़े जा रहे पानी से घाघरा नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। यही वजह है कि गांजरी क्षेत्र में घाघरा विकराल रूप लेती जा रही है। मंगलवार सुबह से शाम तक बैराजों से सवा लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
इससे नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। दुर्गापुरवा में नदी ने चार बीघा फसल निगल ली। वहीं दस मीटर तक सड़क बह गई। घाघरा नदी रेउसा में दुर्गापुरवा के निकट तेजी से कटान कर रही है।
गांव निवासी राजितराम व बलराम ने गांव के बाहर खेत में घुइयां की फसल बो रखी है। सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक नदी दोनों किसानों की चार बीघा फसल बहा ले गई। इसी रात नदी ने गांव में मौजूद डामर की 100 मीटर सड़क को काट दिया। गांव में करीब 150 परिवार रहते हैं। ये सभी परिवार कटान को देख भयभीत हैं।
नदी क्षेत्र के कोनी व गोड़ियन पुरवा में भी कटान कर रही है। दर्जिन रेती व कटैला पुरवा के निकट की भूमि नीची है, जिसकी वजह से नदी का पानी दायरे के बाहर आ गया है और कटैला पुरवा व दर्जिन रेती की तरफ बढ़ रहा है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदे इसे बाढ़ की आहट मान रहे हैं।
उधर, टापू पर बसे पचीसा, रेती पुरवा व बदहाली पुरवा में भी घाघरा की कटान जारी है। इन दिनों टापू पर पहुंचने के लिए लोगों को करीब 5 किलोमीटर का रास्ता पानी पर तय करना पड़ेगा। टापू पर बसे परिवार दूध का कारोबार करते हैं।
नदी के उफान मारने से उनका निकलना मुश्किल हो गया है। मंगलवार को घाघरा, शारदा व बनबसा बैराजों से 1,23667 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। तटीय क्षेत्र के रामलालपुरवा, ठेकेदार पुरवा, मरेली, जैतहिया, नगीना पुरवा आदि गांवों में बाढ़ के संदेह भर से लोग दहशत में हैं। ग्रामीणों ने बाढ़ से बचने के इंतजाम करने तेज कर दिए हैं।