सीतापुर। परसेंडी ब्लॉक की ग्राम पंचायत रिखौना में गांव के विकास के लिए भेजी गई धनराशि का दुरुपयोग करने के साथ ही अन्य गड़बड़ी भी हुई। विकास कार्यों की मद में आवंटित धनराशि निकालने के बाद कूट रचित दस्तावेज तैयार कर उसे हड़प लिया गया। पहली जांच में दोषी पाए जाने पर प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज किए गए थे। अंतिम जांच में भी दोषी पाए जाने पर डीएम अभिषेक आनंद ने प्रधान कमरजहां को बर्खास्त कर दिया है।
ग्राम पंचायत रिखौना में विकास कार्य कराने के लिए उपलब्ध कराई गई धनराशि का दुरुपयोग किए जाने की शिकायत यहां के निवासी ध्रुव कुमार शुक्ला और नरेश अवस्थी ने नोटरी शपथ पत्र पर डीएम से 15 अप्रैल 2023 को की थी। डीएम ने इसकी जांच जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नरेश कुमार से कराई थी। इसमें प्रधान कमरजहां को 4,85,000 की धनराशि दुरुपयोग करने का दोषी पाया गया। जिस पर उनके प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारी सीज किए करते हुए अंतिम जांच जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी और अधिशासी अभियंता सिंचाई से कराई गई। इसमें भी प्रधान के साथ संबंधित सचिव दोषी पाए गए।
साथ ही मनरेगा योजना के 16,42,600 रुपये के दुरुपयोग किए जाने पर प्रधान, सचिव, जेई और तकनीकी सहायक से वसूली के आदेश पहले से ही जारी किए गए है। जांच अधिकारी को कूट रचित एमबी बनाकर दे दी गई। सहायक अभियंता लघु सिंचाई ने चार जेई के स्पष्टीकरण का उल्लेख करते हुए इस संबंध में डीएम को पत्र भेजा था। इसी आधार पर डीएम अभिषेक आनंद ने प्रधान कमरजहां को प्रधान पद से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है।
तीन सचिव भी पाए गए थे दोषी
जांच अधिकारी को 48 हैंडपंपों की मरम्मत संबंधी दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए गए। इस संबंध में डीपीआरओ ने पाया कि सचिव ओम प्रकाश जुलाई से अक्तूबर 2021 तक के लिए व सचिव प्रेयस गहोई अक्तूबर 2021 से जून 2022 तक और सुरेश चंद्र वर्मा जून 2022 से जुलाई 2023 तक के दस्तावेजों के लिए उत्तरदायी हैं। डीएम ने संबंधित सचिवों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी दिए हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी डा. निरीश चंद्र साहू ने बताया कि डीएम ने प्रधान कमरजहां को पदच्युत करने और तीनों सचिवों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।