रेलमंत्री सुरेश प्रभु के बजट से सीतापुर वासियों के हाथ सिर्फ मायूसी आई। गुरुवार को सदन में पेश रेल बजट से यहां के लोग काफी आस लगाए बैठे थे। उम्मीद थी कि धार्मिक और पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य को कई सौगात मिलेगी, पर मायूसी ही हाथ लगी। सीतापुर जनपद के नैमिषारण्य में भारी संख्या में पर्यटक आते हैं।
हर माह अमावस्या पर नैमिषारण्य में लाखों की भीड़ उमड़ती हैं। जिनके लिए यहां न तो रेलमार्ग दुरुस्त है और न सड़क मार्ग। लोग निजी संसाधनों से यहां पहुंचते हैं। हालांकि रेलवे ने सीतापुर-नैमिषारण्य-मिश्रिख वाया बालामऊ तक रेल ट्रैक बिछा रखा है। इस ट्रैक पर नैमिषारण्य और मिश्रिख स्टेशन भी पड़ते हैं।
जहां तनिक भी यात्री सुविधाएं नहीं है। इस रूट में नैमिषारण्य के लिए एक जोड़ी ट्रेन चलती है। एक ट्रेन सुबह यात्रियों को लेकर आती है तो दूसरी यहां से यात्रियों को लेकर जाती है। इसके अलावा इस रूट पर कोई भी ट्रेन नहीं है। रोडवेज बसों का संचालन भी पर्याप्त नहीं है।
यहां के निवासी काफी समय से नैमिषारण्य रेलवे स्टेशन के कायाकल्प के इंतजार में थे। तकरीबन पांच बरस पहले यानी वर्ष 2011-12 के रेल बजट में यहां के नैमिषारण्य और सीतापुर कैंट आदर्श स्टेशन के तौर पर सेलेक्ट हुए थे। उस वक्त यहां के लोगों में खुशी का ठिकाना न था।
उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही इन स्टेशनों की सूरत बदल जाएगी और लोगों को सुविधाएं मिलने लगेंगी पर बजट के अभाव में इनकी सूरत बदली नहीं जा सकी है। इस बार रेल बजट में लोगों में नैमिषारण्य स्टेशन के विकास की आस जगी थी। गुरुवार को सदन में पेश किए गए रेल बजट में निराशा हाथ लगी। सीतापुर के हिस्से में रेल बजट में कुछ भी नहीं आया।