सीतापुर। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या कटवाने के लिए फार्म-7 भरते समय गलत जानकारी देना भारी पड़ सकता है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि फार्म-7 में जानबूझकर गलत घोषणा करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।
आयोग के निर्देश को देखते हुए जिला प्रशासन ने मतदाताओं से फार्म भरते समय सही जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है। इस संबंध में एडीएम, उप जिला निर्वाचन अधिकारी आयुष चौधरी ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने नौ अक्तूबर को पत्र जारी कर फार्म-7 से संबंधित निर्देश दिए हैं। इसमें मतदाता सूची तैयार करने, उसके पुनरीक्षण या संशोधन के दौरान गलत घोषणा करने पर कार्रवाई के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। यदि कोई व्यक्ति मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन करने या किसी नाम को शामिल करने या हटाने के संबंध में ऐसा लिखित बयान देता है, जिसके गलत होने की उसे जानकारी है या गलत होने का अंदेशा है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय होगी।
फार्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की ओर से मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए फार्म-7 में गलत घोषणा किए जाने का मामला सामने आता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि फार्म-7 भरते समय तथ्यों की सही जानकारी दें। किसी दूसरे व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटवाने के लिए बिना ठोस आधार के गलत जानकारी देने से बचें। निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया में सही जानकारी देना जरूरी है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें और किसी के मताधिकार पर गलत तरीके से असर न पड़े।