मिश्रिख नगर पालिका परिषद में स्वच्छत भारत मिशन के 40 लाख रुपये हड़पने के मामले में डीएम के आदेश पर चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। मजे की बात यह है कि इसमें एसडीएम व लीड बैंक मैनेजर समेत नगर पालिका के एक लिपिक को भी शामिल किया गया है जिसकी इस घोटाले में मिलीभगत उजागर हो चुकी है। ऐसे में जांच कमेटी पर भी सवालिया निशान लगने लगे है।
सीतापुर जिले के नैमिषारण्य धाम को मिलाकर बनाई गई मिश्रिख नगर पालिका परिषद में जमकर भ्रष्टाचार का खेल हुआ है। यह पर स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत खर्च करने के नाम पर बिना कोई काम किए 40 लाख रुपये निकाल लिए गए। इसी साल मार्च माह में जब ऑडिट में बात उजागर हुई तो हड़कंप मच गया।
इसके बाद डीएम अनुज सिंह ने पूरे मामले की जांच कमेटी का गठन किया है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस कमेटी में एसडीएम मिश्रिख, एलडीएम, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी व नगर पालिका के एक लिपिक को शामिल किया गया है। सूत्र बताते है कि इस घोटाले के दौरान लिपिक की तैनाती नगर पालिका में रही और उनकी जानकारी में यह खेल हुआ। ऐसे में लिपिक स्तर से जांच कमेटी प्रभावित भी की जा सकती है।
अधिकार सीज फिर भी चेयरमैन के हस्ताक्षर से निकले पैसे
नगर पालिका मिश्रिख में स्वच्छ भारत मिशन के तहत पीएफएमएस(पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम) फंड से 11 बार में 40 लाख रुपये निकाले गए। यह पैसे 1-1-2020 से लेकर 1-05-2021 के बीच में निकले। जबकि इस दौरान यहां की चेयरमैन के अधिकार सीज रहे। सूत्र बताते है कि जून 2020 में चेयरमैन के अधिकार सीज किए गए थे जो मई 2021 में बहाल हो सके। लेकिन इस मद से जो पैसों की निकासी हुई उन चेक में चेयरमैन व तत्कालीन ईओ के संयुक्त हस्ताक्षर रहे। पैसे भले ही कंप्यूटर ऑपरेटर के खाते में गए हो लेकिन इसके बाद वह किसने निकाले यह बताने वाला कोई नहीं है। ऐसे में कंप्यूटर ऑपरेटर को ढाल बनाकर घोटाले के दोषी खुद की गर्दन बचाने में लगे हुए है।
मिश्रिख नगर पालिका परिषद में स्वच्छ भारत मिशन के पैसों में हुई गड़बड़ी की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है। अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट मिलने के बाद जो दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अनुज सिंह, डीएम