प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) यहां बेरोजगारों का संबल नहीं बन पा रहा है। कई महीनों तक भागदौड़ करने के बाद भी बैंकों की जटिल प्रक्रिया के कारण अपेक्षित परिणाम मिलता न देख मायूस आवेदक धीरे-धीरे पैरवी कम कर देते हैं।
नतीजतन, शिक्षित बेरोजगार इस योजना का लाभ पाने से वंचित रह जाते हैं। हालांकि स्वरोजगार अपनाने को लेकर युवक उत्साह दिखाते हुए आवेदन तो खूब करते हैं। इसके बावजूद योजना में लक्ष्य तक पहुंचना दूर की कौड़ी साबित हो रहा है।
शिक्षित बेरोजगारों को स्वावलंबी बनाने के लिए सरकार द्वारा चलाया जा रहा पीएमईजीपी जिले में अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहा है। जटिल प्रक्रिया पूरी करते हुए महीनों की भागदौड़ के बाद कुछ सुविधाभोगी लोग भले इस योजना का लाभ हासिल कर लेते हैं लेकिन पहुंच व पैरवी के अभाव में ज्यादातर को मायूसी ही हाथ लगती है।
सबसे ज्यादा दिक्कतें बैंक के मानक पूरे कर ऋण प्राप्त करने में आती हैं। मार्जिन मनी, गारंटर तथा अन्य कई तरह की शर्ते बैंकों में पूरी करने को कही जाती हैं। किसी भी बेरोजगार के लिए यह शर्तें पूरी करना आसान नहीं होता है। जिसके चलते आम बेरोजगार लाभ से वंचित रह जाते हैं। इन हालात में सरकार के बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें स्वावलंबी बनाने की मंशा पूरी होती नहीं दिख रही है।